मौसम ने आने वाले महीनों में भीषण गर्मी के संकेत दे दिए हैं। राजाजी नेशनल पार्क ने भी मौसम के इस रुख को गंभीरता से लिया है।
पार्क प्रशासन ने पानी की तलाश में जंगली जानवरों के आबादी क्षेत्र में रुख को रोकने के लिए अभी से प्रयास शुरू कर दिए हैं। प्रशासन जंगल में पानी की कमी वाले इलाकों में कम लागत में तैयार होने वाले वाटर होल टैंक बनाने शुरू कर दिए हैं। इसके अलावा प्राकृतिक जलस्रोतों, पुरानी जलधाराओं के भी विकसित करने का कार्य किया जा रहा है।
राजाजी टाईगर रिजर्व पार्क की मोतीचूर रेंज द्वारा सूखाग्रस्त वन बीटों के वन्यप्राणियों की प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। पार्क प्रशासन बीटों में हजारों लीटर क्षमता के कच्चे वाटर होल टैंक विकसित कर रहा है।
इन वाटर टैंकों में जमीन से मोटर पंपों के जरिये पानी निकालकर जमा किया जाएगा। वहीं, रेंज की कई बीटों में प्राकृतिक जलस्रोत भूजल स्तर में गिरावट के कारण सूखे की कगार पर हैं। ऐसे स्रोतों की खुदाई कर पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है।
30 मीटर लंबे और इतनी ही चौड़ाई के साथ ही एक मी. गहराई वाले वाटर होल टैंक बनाए जा रहे हैं। इनमें पालीथिन शीट बिछाकर वन्यजीवों के लिए पानी स्टोर किया जाएगा। रेंज की छत्रसाल बीट में टैंक बनाने का काम अंतिम चरण पर है, अन्य सूखाग्रस्त बीटों में भी टैंक बनाने का काम चल रहा है। वन्यजीवों को जंगल में पानी उपलब्ध होने पर उनके आबादी क्षेत्र में घुसने की आशंका कम हो जाएगी।
- महेंद्र गिरि गोस्वामी, रेंज अधिकारी
पानी में सेंधा नमक का छिड़काव
विभाग पानी में सेंधा नमक का छिड़काव कर पानी का स्वाद भी जंगली जानवरों के अनुरूप बेहतर बनाने का प्रयास भी कर रहा है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो जंगल में ही जानवरों को पर्याप्त पानी उपलब्ध होने पर उन्हें आबादी क्षेत्र की ओर जाने से रोका जा सकेगा।
इन बीटों में उपलब्ध है पर्याप्त पानी
मंजाड़ा बीट, गूलर पड़ाव पूर्वी और गूलर पड़ाव पश्चिमी।
यह बीटें हैं सूखे की चपेट में
सत्यनारायण बीट, पनियाला, कोयलपुरा, छत्रसाल और डांडा।