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कृषि विभाग में लाखों का खेल, स्रोत हैं नहीं, जलाशय बना दिए

Sun, 13 Mar 2016 08:58 AM IST
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
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घोटाला - फोटो : demo
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कृषि में लाखों के किए जा रहे खेल का खुलासा हुआ है। विभाग में केंद्र पोषित समेकित जलागम प्रबंध कार्यक्रम परियोजना में 66 लाख रुपये की लागत से हुए कार्यों में वित्तीय अनियमितता सामने आई है। 
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जिला प्रशासन की ओर से की गई जांच में इसका खुलासा हुआ है। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि विभाग की ओर से चकराता ब्लॉक के 15 गांवों में सिंचाई के लिए अधिकतर जलाशय उन स्थानों पर बना दिए गए हैं, जहां पानी के लिए स्रोत ही नहीं हैं। वहीं परियोजना में कच्चे तालाब का प्रावधान न होने के बावजूद तालाब बनाए गए।

दून के चकराता ब्लॉक में केंद्र पोषित योजना में हुई अनियमितता का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन की ओर से जांच कमेटी गठित कर प्रकरण की जांच कराई गई। 
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जांच में हुआ अनियमितताओं का खुलासा:
जांच में ग्राम पंचायत कोटा, ग्राम पंचायत सिलामू, ग्राम पंचायत खबऊ, ग्राम पंचायत जस्टा, ग्राम पंचायत बेगी, ग्राम पंचायत बायला, ग्राम पंचायत असोई, ग्राम पंचायत कावाखेड़ा, भुल्हाड़, रजाणु, पिंगवा, थारटा, पुनिंग, कुनवा, गोरछा सहित कई गांवों में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। 

जांच में पाया गया कि ब्लॉक की ग्राम पंचायत बुल्हाड उदावा में 15 लाख 97 हजार रुपये मुख्य कृषि अधिकारी के अनुमोदन के बगैर ही निकाल लिए गए। 

ग्राम पंचायत हताड़ संताड़ में जांच टीम को चारापत्ती के 4000 पौधे सड़क के नीचे छानियों में लगाया होना बताया गया, लेकिन जांच टीम को कार्यस्थल पर पौधे नहीं मिले। जबकि डीपीआर में कच्चे तालाब देय न होने के बावजूद इनका भुगतान होना दर्शाया गया। 

एक और जांच ने खड़े किए सवाल:
जांच में वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई के बजाय प्रकरण में लीपापोती के प्रयास हो रहे हैं। 

प्रशासन की जांच के बाद विभाग की ओर से एक और जांच बैठा दी गई है। सवाल यह है कि प्रशासन की जांच में अनियमितता का खुलासा होने के बाद इस जांच का क्या मतलब है। 

जांच टीम ने की कार्रवाई की संस्तुति:
अपर जिलाधिकारी प्रताप सिंह शाह, अधिशासी अभियंता अवस्थापना खंड सिंचाई विभाग देहरादून संजय कुमार पाठक और कोषाधिकारी पूजा नेगी ने जिलाधिकारी को सौंपी जांच रिपोर्ट में कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की संस्तुति की है। 
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वित्तीय अनियमितता के इस मामले की जांच के लिए विभाग की ओर से विभागीय अधिकारियों की कमेटी बनाई गई है, जो प्रकरण की जांच करेगी। 
- गौरीशंकर आर्य, निदेशक कृषि विभाग
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