विधि-विधान के साथ शुभ लग्न में पूर्वाह्न 11 बजे द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर के कपाट खोल दिए गए हैं। प्रशासन व पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में परंपरानुसार मंत्रोच्चारण के बीच पुजारी शिव लिंग ने आराध्य की भोग मूर्तियों को मंदिर के गर्भगृह में विराजमान किया। इसके साथ ही धाम में ग्रीष्मकालीन पूजा-अर्चना शुरू हो गई है। कपाटोद्घाटन के दौरान देवस्थानम बोर्ड से आठ, रांसी एवं गौंडार गांव के हकहकूकधारी एवं जमाणी 15 , तहसील प्रसासन ऊखीमठ से पांच एवं पुलिस के तीन जवान मौजूद रहे।
सोमवार सुबह पांच बजे गौंडार गांव में पुजारी शिव लिंग ने द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर की चल उत्सव विग्रह डोली की पूजा-अर्चना करते हुए अभिषेक के साथ आरती उतारी। सुबह 6 बजे बाबा की डोली ने गौंडार गांव से धाम के लिए प्रस्थान किया। ग्रामीणों ने अपने घरों से ही आराध्य को हाथ जोड़कर विदा किया। बणतोली, खटरा, नानू, कुनचट्टी होते हुए द्वितीय केदार की डोली सुबह 10 बजे देवदर्शनी पहुंची। जहां पर अल्म विश्राम व परंपराओं के निर्वहन के उपरांत डोली अपने मंदिर परिसर में पहुंची। मंदिर की तीन परिक्रमा के बाद डोली को परिसर में विराजमान किया गया। इसके बाद पूजा-अर्चना व वेद मंत्रोच्चारण के बीच पुजारी ने डोली से आराध्य की भोग मूर्तियों को उतारकर मंदिर के गर्भगृह में छह माह की पूजा-अर्चना के लिए विराजमान किया। इस मौके पर भक्तों को कपाट बंद होने के दौरान स्वयं भू लिंग पर चढ़ाए गए पुष्प, चंदन व अक्षत को प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। मौके पर मंदिर के वेदपाठी मृत्युंजय हीरेमठ, तहसीलदार दीवान सिंह राणा, राजस्व निरीक्षण जयकृत रावत, एसआई पुनीत दनौसी, राजस्व उप निरीक्षक दिवाकर डिमरी, डोली प्रभारी अनूप पुष्पवाण, उम्मेद सिंह नेगी, जमाणी शिव सिंह रावत, भगत सिंह पंवार, वीर सिंह पंवार, मदन सिंह पंवार, कुंवर सिंह पंवार सहित अन्य लोग मौजूद थे।
आराध्य ने ताम्रपात्रों का किया निरीक्षण
द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर ने अपने धाम पहुंचकर वहां मौजूद अपने ताम्रपात्रों का निरीक्षण किया। डोली में विराजमान आराध्य ने मंदिर की तीन परिक्रमा के दौरान परिसर में रखे अपने एक-एक पात्र का जायजा लिया। मंदिर में भगवान के ताम्रपात्र मौजूद हैं, जिसमें आचमन कलश से लेकर बड़े-बड़े बर्तन हैं। कपाट बंद होने व कपाट खुलने के समय आराध्य स्वयं अपने पात्रों का निरीक्षण करते हैं। अगर, कोई बर्तन नहीं दिखाई देता तो तब तक डोली आगे नहीं बढ़ती।