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केदारनाथ में अखंड ज्योति का संरक्षण करेगी पंच पंडा समिति रुद्रपुर

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भगवान श्रीकेदारनाथ यात्रा में नया अध्याय जुड़ रहा है। दशकों पूर्व बंद हो चुकी तेल कलश यात्रा को पंच पंडा समिति रुद्रपुर ने पुन: शुरू किया है। तेल कलश यात्रा में रुद्रपुर व सांकरी गांव के प्रत्येक घर से बाबा केदार की अखंड ज्योति के लिए सरसों का तेल एकत्रित किया गया है। पूर्व में कालीमठ घाटी के खुन्नू और मद्महेश्वर घाटी के रांसी गांव के घरों से भी तेल एकत्रित किया जाता था।
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केदारघाटी के रुद्रपुर गांव के पंच पंडा समिति को बाबा केदार की अखंड ज्योति के संरक्षण का अधिकार है। वर्ष 1952 तक रुद्रपुर, सांकरी, खुन्नू और रांसी गांव के ग्रामीण तेल कलश यात्रा में शामिल होकर अपने घरों से बाबा केदार की यात्रा में अखंड ज्योति के लिए तेल एकत्रित कर तेल कलश को धाम पहुंचाते थे। बाद के वर्षों में किन्हीं कारणों से यह परंपरा बंद हो गई, लेकिन इस वर्ष अखंड ज्योति के लिए तेल एकत्रित कर उसे कलश में रख धाम पहुंचाने की परंपरा को पुन: शुरू किया गया है। परंपराओं के निर्वहन के साथ रुद्रपुर और सांकरी गांव के प्रत्येक घर से तेल एकत्रित किया गया है।
पंच पंडा समिति के आनंद शुक्ला बताते हैं कि रुद्रपुर के शुक्ला लोग टिहरी राजा के केदारनाथ में तीर्थ पुरोहित हुआ करते थे। तब, राजा ने उन्हें रांसी, सांकरी और खुन्नू गूठ गांव के रूप में भेंट किए थे। तभी से बाबा केदार की यात्रा में तेल कलश यात्रा शुरू की गई थी। लेकिन 1952 के बाद किन्हीं कारणों से यह धार्मिक परंपरा बंद हो गई, जिसे अब पुन: शुरू किया गया है। तेल कलश के तेल से बाबा केदार की अखंड ज्योति यात्राकाल में जलती रहेगी।
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