जखोली ब्लॉक के सिलगढ़ पट्टी के गांवों में काश्तकारों की सिंचित भूमि के लिए निर्मित सिंचाई नहरों के क्षतिग्रस्त होने से खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। इस कारण फसलें बर्बाद हो रही हैं। काश्तकारों व जनप्रतिनिधियों ने सिंचाई विभाग से नहरों की मरम्मत की मांग की है।
18 ग्राम पंचायतों वाले सिलगढ़ में करीब 3000 नाली से अधिक सिंचित भूमि है। यहां तक पर्याप्त पानी पहुंचाने के लिए लस्तर नदी समेत अन्य गाद-गदेरों से बरसारी-मवाणगांव व बंदरतोली-सिरसोलिया सिंचाई नहर और कमंडल गूल समेत अन्य कई छोटी नहरें बनाई गई हैं। लंबे समय से ये सभी नहरें व गूलें भूस्खलन व अन्य कारणों से बंद पड़ी हैं। इस कारण खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा है। बीते वर्ष ग्रामीणों ने स्वयं के प्रयास से बंदरतोली-सिरसोलिया सिंचाई नहर की मरम्मत के प्रयास भी किए गए थे लेकिन पहाड़ी से गिरे मलबे के कारण यह सिंचाई नहर पुन: क्षतिग्रस्त हो गई। इस कारण पानी का बहाव ठप हो गया।
काश्तकार राजेंद्र पंवार, राम प्रसाद भट्ट, जगदीश प्रसाद, गिरीश बुटोला, आरती पंवार का कहना है कि विभाग को कई बार समस्या से अवगत कराया गया लेकिन अधिकारी पल्ला झाड़ रहे हैं। पानी के अभाव में कुछ दिन पहले बोई गई फसलों में वृद्धि नहीं हो रही है। दूसरी तरफ क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्मला बहुगुणा ने डीएम से आपदा मद में बजट स्वीकृत कर क्षतिग्रस्त नहरों व गूलों के प्राथमिकता से सुधारीकरण की मांग की है।
कोट :
इस बार बारिश से जिले की कई सिंचाई नहरों को क्षति पहुंची है। उनका आकलन कर मरम्मत के लिए आपदा, जिला व राज्य मद में प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। हरसंभव कोशिश की जा रही है कि ज्यादा से ज्यादा नहरों की मरम्मत कर पानी का संचालन किया जा सके।
-पीएस बिष्ट, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग, रुद्रप्रयाग