मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक की घोषणा के बाद भी राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय गुप्तकाशी हाशिए पर है। केदारनाथ आपदा के नौ वर्ष बाद भी अस्पताल का उच्चीकरण नहीं हो पाया है। साथ ही यहां प्राथमिक उपचार की सुविधाएं भी दम तोड़ रही हैं, जिससे केंद्र रेफर सेंटर बना हुआ है।
केदारनाथ आपदा के बाद तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा, स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी, कैबिनेट डा. हरक सिंह रावत जितनी बार केदारघाटी पहुंचे, गुप्तकाशी अस्पताल उच्चीकरण की बात कही। वर्ष 2014 से सीएम हरीश रावत ने भी गुप्तकाशी अस्पताल के उच्चीकरण की घोषणा की, लेकिन आज तक कार्रवाई नहीं हो पाई। अस्पताल में चिकित्सक आवास बदहाल हो रखा है। यहां मूलभूत सुविधाएं तो दूर दीवारें व फर्श क्षतिग्रस्त हो रखे हैं।
पूर्व प्रमुख ममता नौटियाल, ग्राम प्रधान प्रेम सिंह, टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष राय सिंह राणा आदि का कहना है कि गुप्तकाशी संपूर्ण केदारघाटी का प्रमुख केंद्र है, लेकिन यहां प्राथमिक स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं भी नसीब नहीं हो पा रही है। दो-दो मुख्यमंत्री अस्पताल उच्चीकरण की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन स्थिति जस की तस है।
गुप्तकाशी अस्पताल के उच्चीकरण को लेकर शासन व निदेशालय को प्रस्ताव बनाकर भेजा जा रहा है। साथ ही चिकित्सक आवास की मरम्मत के लिए जिला योजना में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
- डा. बिंदेश कुमार शुक्ला, मुख्य चिकित्साधिकारी, रुद्रप्रयाग