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तुंगनाथ सेंचुरी क्षेत्र में एनजीटी व डोभा कमेटी के नियमों को ठेंगा दिखा रहे हेलीकॉप्टर

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तुंगनाथ सेंचुरी क्षेत्र में हेली कंपनियां नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं। यहां हेलीकॉप्टर सघन वन के ऊपर बहुत कम ऊंचाई पर उड़ान भर रहे हैं। हेलीकॉप्टरों की तेज आवाज ने वन्यजीवों का चैन छीन लिया है। इससे पक्षियों का प्रजजन भी प्रभावित हो रहा है। जबकि इस क्षेत्र से गुजर रही सड़क पर कई स्थानों पर हॉर्न बजाना तक प्रतिबंधित है। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग ने मामले में चिंता व्यक्त कर यूकाडा को पत्र भेजने की बात कही है। साथ ही पर्यावरणविद् और पक्षी विशेषज्ञों ने सेंचुरी एरिया में हेलीकॉप्टरों की उड़ान पर रोक लगाने की मांग की है।
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केदारनाथ के लिए नौ हेली कंपनियों के हेलीकॉप्टर अलग-अलग हेलीपैड से उड़ान भर रहे हैं। कई हेलीकॉप्टर यात्रियों को लेकर बदरीनाथ से केदारनाथ भी जा रहे हैं। ये हेलीकॉप्टर यहां अलग-अलग रूटों पर सघन वन क्षेत्र में बहुत कम ऊंचाई पर उड़ान भर रहे हैं। बनियाकुंड, धोतीधार पनार बुग्याल और तुंगनाथ मंदिर के समीप से रुद्रनाथ होकर हेलीकॉप्टर बदरीनाथ पहुंच रहे हैं। पूरे क्षेत्र में सघन वन है और यहां कई दुर्लभ प्रजाति के वन्यजीव भी पाए जाते हैं।
इस क्षेत्र में हिमालयन थार, घुरड़, कस्तूरी मृग, भालू, गुलदार सहित अन्य वन्यजीव भी हैं। साथ ही पक्षियों की 150 से अधिक प्रजातियां भी पाई जाती हैं। इन दिनों बाहरी प्रांतों से यहां 60 से अधिक प्रजातियों के पक्षी प्रजनन के लिए पहुंचे हुए हैं। हेलीकॉप्टर की तेज गर्जना से वन्यजीव और पक्षी विचलित हो रहे हैं। आलम यह है कि हेलीकॉप्टर की आवाज सुनते ही कस्तूरी मृग, घुरड़, हिमालयन थार इधर-उधर दौड़ने लगते हैं। जानकारों का कहना है कि केदारनाथ के साथ तुंगनाथ व रुद्रनाथ भी सेंचुरी क्षेत्र में शामिल है। इसलिए डोभा समिति व एनजीटी के निर्देश यहां भी लागू होते हैं।
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केदारनाथ यात्रा के लिए बनाए गए थे नियम
वर्ष 2015 में डोबा पर्यावरण समिति ने केदारघाटी में संचालित हेलीकॉप्टर सेवा से केदारनाथ वन्य जीव अभ्यारण्य के वन्यजीवों पर विपरीत प्रभाव पड़ने की बात कही थी। साथ ही एनजीटी में वाद में दायर किया था। इस पर एनजीटी ने उत्तराखंड सरकार को इस मामले में अध्ययन के लिए कहा था। वर्ष 2016 में भारतीय वन्य जीव संस्थान ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि मंदाकिनी व केदारघाटी में हेलीकॉप्टर कम ऊंचाई पर उड़ान भर रहे हैं। इसके बाद केदारनाथ यात्रा में हेलीकॉप्टरों के लिए न्यूनतम ऊंचाई 600 मीटर तय की गई थी। साथ ध्वनि का मानक 50 डेसीबल रखा गया था। इन मानकों की निगरानी के लिए केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग ने भीमबली में मॉनीटरिंग स्टेशन स्थापित किया है। रेंजर शिवांगी डिमरी ने बताया कि इस बार केदारनाथ क्षेत्र में नियमों के उल्लंघन का मामला सामने नहीं आया है।
तुंगनाथ, पनार बुग्याल और रुद्रनाथ क्षेत्र में हेलीकॉप्टर का बहुत कम ऊंचाई पर उड़ना चिंताजनक है। यह एनजीटी के नियमों का सीधा उल्लंघन है। इस संबंध में यूकाडा के साथ ही शासन को भी पत्र भेजा जा रहा है। -इंद्र सिंह नेगी, डीएफओ, केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग गोपेश्वर/चमोली।
हेलीकॉप्टर की उड़ान के लिए कोई तय रूट नहीं होता है। यह घाटी को आधार मानकर होता है। मौसम खराब होने पर अन्य वैकल्पिक रूट उपयोग में लाया जाता है। तुंगनाथ, रुद्रनाथ मंदिर और बुग्याल क्षेत्र में भी 600 मीटर ऊंचाई व 50 डेसीबल ध्वनि का मानक रहेगा। केदारनाथ से बदरीनाथ के लिए उड़ान भर रहे हेलीकॉप्टर से संबंधित कंपनियों को पत्र भेजकर नियमों का पालन करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। -कर्नल समीर, ऑपरेशन हेलीकॉप्टर, यूकाडा।
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