थानाध्यक्ष पंखोली के अनुसार गौरीकुंड-खरक-वासुकीताल पर भेजी गई रेस्क्यू टीम ड्रोन से भी रेकी कर रही है। उन्होंने बताया कि चारों लोगों ने अपने परिजनों के जो नंबर केदारनाथ रवानगी से पहले दर्ज कराए, उन पर संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसके साथ ही ट्रैकरों के मोबाइल नंबर भी सर्विलांस पर लगाए गए हैं, ताकि मोबाइल नंबर चालू होते ही लोकेशन मिल सके।
ट्रैक पर जाने से सवाल उठे
रोक के बावजूद ट्रैकर्स के ट्रैकिंग पर निकल जाने से सिस्टम पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। मसलन किसी भी लेवल पर उनसे पूछताछ, चेकिंग क्यों नहीं की गई? उन्हें ट्रैक पर कैसे जाने दिया गया?
पूर्व में दो ट्रैकर की हो चुकी मौत
2017 में बदरीनाथ-पनपतिया-मद्महेश्वर ट्रैकिंग रूट पर पश्चिम बंगाल के 11 ट्रैकर फंसे थे, जिनमें से एक की मौत हो गई थी। 2018 जून में भी इसी रूट पर 23 सदस्यीय ट्रैकिंग दल भटक गया था। इस दौरान भी एक ट्रैकर की जान चली गई थी। इसके बाद 2018 सितंबर में आईआईटी रुड़की का ट्रैकिंग दल गंगी से केदारनाथ पैदल ट्रैक पर भटक गया था। मनणी माई बुग्याल में भी पश्चिम बंगाल के ट्रैकर फंस गए थे। 2019 में देवरियाताल में भी एक विदेशी पर्यटक भटक गया था।
हेलीकॉप्टर की मदद से क्षेत्र में दो बार रेकी की जा चुकी है। साथ ही ड्रोन से भी खोज हो रही है। समय-समय पर मामले की जानकारी ली जा रही है।
-वंदना सिंह, डीएम, रुद्रप्रयाग
रेस्क्यू टीमें ट्रैकिंग रूट से लेकर जंगल तक में लापता ट्रैकर्स की खोजबीन कर रही है, लेकिन अभी तक कोई सूचना नहीं मिली है।
-नवनीत सिंह, एसपी, रुद्रप्रयाग
प्रभागीय कार्यालय से ट्रैकिंग के लिए कोई अनुमति नहीं दी जा रही है। कोरोना संक्रमण के चलते अभी ट्रैकिंग और पर्यटन गतिविधियों पर शासन से रोक है।
-अमित कंवर, डीएफओ, केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग