उत्तराखंड में वनों के विकास और वनाग्नि से जंगलों को बचाने के लिए प्रदेश सरकार अपना वन योजना का संचालन करेगी। इसके लिए शासन स्तर पर योजना बनाई गई है, जिसमें वनों को आग से बचाने के लिए विभागों व गांवों को सामूहिक जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। प्रदेश में वनाग्नि वाले अति संवेदनशील स्थानों को चिह्नित कर वहां बरसाती सीजन में उचित इंतजाम किए जाएंगे। साथ ही जंगलों में जल संरक्षण के लिए मनरेगा में वृहद स्तर पर कार्य कर चालखाल बनाए जाएंगे, जिससे वर्षभर नमी बनी रहे और आग का असर कम से कम हो।
अपना वन योजना के तहत वन, राजस्व, पुलिस, कृषि, उद्यान सहित अन्य विभागों को वनों के संरक्षण की सामूहिक जिम्मेदारी दी जाएगी। हरेला पर्व से जहां-जहां जो विभाग पौधारोपण करेगा, वहां के संरक्षण की पूरी जिम्मेदारी भी उसी विभाग की होगी। प्रत्येक माह रोपित पौधों की प्रगति रिपोर्ट तैयार करनी होगी। युवा व महिला मंगल दलों के साथ ही ग्राम पंचायतों, महिला समूहों को भी वनों के विकास में आगे लाया जाएगा। वन विभाग की ओर से भी अमृत सरोवरों का निर्माण किया जा रहा है। रुद्रप्रयाग वन प्रभाग में छह रेंजों में 15 अमृत सरोवर बनाए जा रहे हैं, जिनकी बरसाती जल संरक्षण की क्षमता लगभग दो करोड़ लीटर होगी। इसके अलावा ग्राम पंचायत स्तर पर भी मनरेगा में 75 अमृत सरोवर बनाए जा रहे हैं। साथ ही कई चालखाल, खंतियां बनाई जा रही हैं। जंगलों के ऊपरी क्षेत्रों में 4000 हजार लीटर क्षमता के जल भंडारण टैंक भी बनेंगे, जिससे वनाग्नि की घटना से कम से कम समय में काबू पाया जा सके। इस मुहिम से जिले के कई गांवों के प्राकृतिक जल स्रोतों को भी नया जीवन मिलेगा। बता दें कि जखोली ब्लॉक के लुठियाग गांव ने बरसाती जल संरक्षण से जहां अपनी जल जरूरतों को पूरा कर रहा है। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई है।
वनाग्नि की घटनाओं को कम से कम करने और वनों के विकास के लिए अपना वन योजना शुरू की जा रही है। इस योजना के तहत विभागों के साथ गांवों को वनों के संरक्षण की जिम्मेदारी दी जाएगी। जहां-जहां पौधरोपण होगा, उस क्षेत्र की जिम्मेदारी वहां के ग्रामीणों, विभाग और युवा व महिला मंगल दल की होगी। -सुबोध उनियाल, वन मंत्री उत्तराखंड शासन।