प्राकृतिक जलस्रोतों कासंरक्षण कर उन्हें नया रूप दिया जा रहा है। रुद्रप्रयाग वन प्रभाग की ओर से कैंपा योजना में इस वर्ष 25 प्राकृतिक स्रोतों को चिह्नित कर उन्हें संरक्षित किया जाएगा। पहले चरण में दो स्रोतों को संरक्षित किया गया है।
वन विभाग की ओर से बाघ हैं तो वन हैं, वन हैं तो जल है, थीम के तहत कैंपा योजना में प्राचीन जलस्रोतों को संरक्षित किया जा रहा है। रुद्रप्रयाग वन प्रभाग पहले चरण में ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग पर सिरोहबगड़ में प्राकृतिक स्रोत को पुनर्जीवित करेगा। सड़क की ऊपरी तरफ से स्रोत का पानी संरक्षित करते हुए हाईवे के किनारे पर लाया गया है। साथ ही र्दाइं व बायीं तरफ सुरक्षा दीवार बनाई गई है। इसी तरह तिलवाड़ा-मयाली मोटर मार्ग पर हरिनगर में भी प्राकृतिक जलस्रोत को संरक्षित कर नया रूप दिया गया है। प्रभागीय डीएफओ वैभव कुमार ने बताया कि इस वर्ष 25 स्रोतों के संरक्षण का लक्ष्य रखा गया है। इनके बारे में पूरी जानकारी ऑनलाइन प्राप्त की जा सकती है।