भगवान केदारनाथ की पंचमुखी उत्सव चल विग्रह डोली श्रद्धालुओं के जयकारों के साथ अपने दूसरे पड़ाव फाटा पहुंच गई है। यहां डोली का भव्य स्वागत किया गया। इस मौके पर केदारघाटी के गांवों से आए बाबा केदार के भक्तों ने आराध्य के दर्शन कर मनौतियां मांगी।
सुबह सात बजे से विश्वनाथ मंदिर में बाबा केदार की पंचमुखी डोली की विशेष पूजा-अर्चना शुरू हो गई थी। मंदिर के पुजारी शशिधर लिंग और केदारनाथ के लिए नियुक्त मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग ने डोली की आरती की। मंदिर की परिक्रमा और वेदपाठियों के मंत्रोच्चार और वेदमंत्रों के साथ बाबा केदार की डोली ने सुबह आठ बजे अपने धाम के लिए प्रस्थान किया। इस मौके पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा।
6-कुमाऊं रेजीमेंट के बैंड धुनों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ मुख्य बाजार होते हुए जीआईसी के छात्र-छात्राओं ने डोली को विदा किया। इसके बाद सैकड़ों भक्तों के बाद बाबा केदार खुमेरा, ब्यूंग गाड़, मैखंडा, खाट गांव होते हुए दोपहर बाद सवा एक बजे डोली फाटा पहुंची। इस मौके पर श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के पदाधिकारियों सहित जनप्रतिनिधियों सहित प्रशासन व पुलिस के कर्मचारी मौजूद थे।
बाबा के दर्शनों को जुटी भीड़
गुप्तकाशी। बाबा केदार की डोली के स्वागत में रातभर विश्वनाथ मंदिर में कीर्तन-भजन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना रहा। गुप्तकाशी सहित निकटवर्ती गांवों की कीर्तन मंडलियों ने जागरण किया। इस दौरान आराध्य के दर्शनों के लिए मंदिर में भीड़ जुटी रही। स्थानीय युवाओं ने भी रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
छलक उठी आंखे..
गुप्तकाशी। जून 2013 की आपदा में अपनों को खो चुके लोगों की आंखें उस समय छलक उठी, जब बाबा केदार की डोली गुप्तकाशी से धाम के लिए विदा हुई। कुछ महिलाएं तो फफक-फफक कर रोने लगी। रोते हुए उन्होंने कहा कि आज हमारे अपने भी जिंदा होते, तो वे भी इसी उल्लास और जयकारे के साथ धाम को प्रस्थान करते।