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हिमालय संरक्षण के लिए ठोस नीति बनाने पर जोर

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नई दिल्ली संसद भवन में आयोजित युवा संसद में देशभर के 150 युवाओं ने पर्यावरण व सतत विकास और जलवायु परिवर्तन पर अपनी बात रखी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए अपने सुझाव भी दिए, जिन्हें केंद्र सरकार ने गंभीरता से लेते हुए चरणबद्ध अमल में लाने का भरोसा भी दिया। कार्यक्रम में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करने वाले देव राघवेंद्र चौधरी ने हिमालय संरक्षण के लिए ठोस नीति बनाने पर जोर दिया।
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बीते 16 अप्रैल को दो सत्रों में आयोजित युवा संसद का आयोजन पर्यावरण संरक्षण गतिविधि संस्था और मानव रचना रिसर्च इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी फरीदाबाद के संयुक्त पहल पर हुई है। उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करने वाले देव राघवेंद्र ने ग्लोबल वार्मिक के असर से प्रभावित हिमालय के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार से ठोस नीति बनाने पर जोर दिया। कहा कि मिश्रित वनों के विकास के साथ वनीकरण से पर्यावरण को सुधारा जा सकता है। वॉयोलॉजिक और ग्रीन कोरीडोर बनाए जाने चाहिए, जिससे जैव विविधता मजबूत हो और प्रकृति का वृहद संरक्षण हो सके। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि युवा संसद में नई पीढ़ी द्वारा पर्यावरण संरक्षण को लेकर जो सुझाव दिए गए हैं, उन्हें संकलित कर चरणबद्ध अमल में लाया जाएगा। युवा संसद में नार्थ ईस्ट, जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़, यूपी, उत्तराखंड आदि राज्यों से 18 से 30 वर्ष के युवा शामिल हुए, जो पर्यावरण की पढ़ाई के साथ इस क्षेत्र में कार्य भी कर रहे हैं। इधर, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि संस्था के संरक्षक आरबीएस रावत ने बताया कि सभी प्रतिभागियों को चिह्नित स्थानों की सैर भी कराई जाएगी, जहां पर कुछ लोग पर्यावरण संरक्षण के लिए वर्षों से कार्य कर रहे हैं।
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