कालीमठ घाटी में बैंक नहीं होने से बुजुर्ग व बीमार पेंशनर सबसे ज्यादा परेशान
गुप्तकाशी। कालीमठ घाटी में बैंक सुविधा नहीं है, जिससे घाटी के 13 गांवों के लोगों को खाता खुलवाने के लिए आठ से 25 किमी की दूरी तय करनी पड़ रही है। गांवों में रह रहे बुजुर्ग, बीमार पेंशनरों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है।
चौमासी के ग्राम प्रधान मुलायम सिंह तिंदोरी ने बताया कि गांव से 250 ग्रामीणों के खाते गुप्तकाशी व ऊखीमठ में संचालित बैंकों में हैं। पेंशन के लिए बुजुर्गों को प्रतिमाह गांव से गुप्तकाशी व ऊखीमठ की दो तरफा 50 किमी की दौड़ लगानी पड़ रही है। स्थिति यह है कि गांव की वयोवृद्ध कीर्ति देवी व आलम सिंह के परिजनों द्वारा उन्हें वाहन बुक कर बैंक तक ले जाना पड़ रहा है।
वहीं, चिलौंड गांव के पूर्व ग्राम प्रधान मोहन सिंह राणा का कहना है कि स्कूली बच्चों को भी छात्रवृत्ति खाते के लिए गांव से सड़क तक चार किमी पैदल और फिर 25 किमी वाहन का सफर कर गुप्तकाशी पहुंचना होता है। कालीमठ घाटी में इंटरनेट नेटवर्क नहीं होने के कारण डिजीटल बैंकिंग सेवा, ग्रामीणों के लिए सपने के समान है। क्षेत्र के ओम प्रकाश भट्ट, कुलदीप राणा, अव्वल सिंह राणा, प्रदीप सिंह राणा का कहना है कि लंबे समय से कोटमा में राष्ट्रीयकृत बैंक शाखा खोलने की मांग हो रही है, लेकिन सुध लेने वाला नहीं है।
कालीमठ घाटी में बैंक शाखा संचालन को लेकर ग्रामीणों व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के प्रस्ताव पर ही आगे की कार्रवाई की जा सकती है। अगर, इस दिशा में कोई पत्र मिलता है, तो उसे नए वित्तीय वर्ष में शामिल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को भेजा जाएगा। आरबीआई द्वारा सर्वे के बाद ही बैंक शाखा खोलने का निर्णय लिया जाएगा।
- चतर सिंह, लीड बैंक अधिकारी, रुद्रप्रयाग