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केदार यात्रा में अनफिट यात्रियों का जोखिम बढ़ा रहा मौत का आंकड़ा

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केदारनाथ यात्रा में अनफिट यात्रियों का जोखिम पर यात्रा करना प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। बीते दो सप्ताह में 15,894 यात्रियों की स्क्रीनिंग में 946 को स्वास्थ्य कारणों से अनफिट घोषित करने के बाद भी 927 अपने जोखिम पर यात्रा कर चुके हैं, जबकि सिर्फ 32 यात्री ही वापस लौटे हैं।
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6 मई से शुरू हुई केदारनाथ यात्रा में पहले दिन से ही हार्टअटैक और सांस लेने में दिक्कत से यात्रियों की मौत हो रही है। सिर्फ 21 दिनों में 42 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। चिकित्सकों के अनुसार, इन यात्रियों की मौत का कारण सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द, घबराहट, सिर दर्द, चक्कर आना रहा है। कपाट खुलने के बाद से अभी तक प्रतिदिन औसतन दो यात्रियों की मौत हो रही है, जो गंभीर समस्या बनती जा रही है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. बीके शुक्ला का कहना है कि अनफिट यात्रियों का अपने जोखिम पर यात्रा करने के बाद से मौत के आंकड़ों में भी वृद्धि हो रही है। लाख कोशिशों के बाद भी स्वास्थ्य कारणों से अनफिट यात्री बात मनाने को तैयार नहीं हैं और शपथ पत्र लिखकर दे रहे हैं। पैदल मार्ग पर यात्रियों की निरंतर जांच की जा रही है और जरूरतमंद यात्रियों को ऑक्सीजन की सुविधा भी उपलब्ध हो रही है। जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग के वरिष्ठ फिजिशियन डा. संजय तिवारी व डा. राजीव गैरोला का कहना है कि यात्री अपने घरों से यात्रा से निकलने से पूर्व अपनी प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच करा लें। अपने डॉक्टर की सलाह पर ही सफर करने का निर्णय लें। वहीं जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने केदारनाथ यात्रा पर आ रहे यात्रियों से अपने स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए यात्रा करने की सलाह दी है।
ऋषिकेश में ही रोके जाएं अनफिट यात्री
रुद्रप्रयाग। सिक्स सिग्मा हाई एल्टीट्यूड मेडिकल सर्विस के सीईओ डा. प्रदीप भारद्वाज का कहना है हरिद्वार, ऋषिकेश में ही यात्रियों की जांच कर अनफिट को रोका जाए। क्योंकि सोनप्रयाग, गौरीकुंड या जोशीमठ पहुंचकर उन्हें यात्रा पर जाने से रोकना बहुत मुश्किल हो रहा है। संवाद
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