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जिले में अधिकारियों द्वारा आमजन के साथ मारपीट व दुव्र्यव्हार नया नहीं

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रुद्रप्रयाग। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की ओर से आम लोगों और छोटे कर्मचारियों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार से सरकारी सिस्टम की छवि खराब हो रही है।
आपदा प्रभावित जनपद में तैनात प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों का रवैया बीते कुछ वर्षों में काफी बदला है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि लगातार वीआईपी ड्यूटी और बैठकों की खुन्नस अधिकारी आम आदमी पर उतार रहे हैं। रविवार को गुप्तकाशी में ऊखीमठ के उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान द्वारा दुकानदार को थप्पड़ मारने की घटना ने इसे और पुख्ता कर दिया है। किसी प्रशासनिक अधिकारी द्वारा आम आदमी के साथ मारपीट का यह पहला मौका है। बीते वर्षों में अगस्त्यमुनि में चौकी प्रभारी द्वारा टैक्सी चालक को थप्पड़ मारना और एक ग्रामीण को पिस्तौल दिखाने की घटना हो चुकी है। यहीं नहीं, करीब छह वर्ष पूर्व एलआईयू के एक जवान ने भी राह चलते व्यक्ति से मारपीट की थी। वर्ष 2016 में मई-जून में पुलिस ने आम लोगों के साथ खूब मारपीट की। मई में जहां पुलिस अधीक्षक पीएन मीणा ने मुख्य बाजार में एक चालक को जोरदार तमाचा जड़ दिया था, वहीं जून में पुलिस कांस्टेबल ने काली कमली धर्मशाला के मैनेजर की जमकर पिटाई कर उसे लहूलुहान कर दिया था। तिलवाड़ा में भी पुलिस चौकी में तैनात जवानों ने एक युवक की लात-घूंसों और लाठी से बर्बरता से पिटाई कर दी थी। रुद्रप्रयाग में तैनात उप जिलाधिकारी सदर के उग्र व्यवहार के कारण बारसंघ का आंदोलन जारी है। 5 अगस्त से वकील एसडीएम कोर्ट का बहिष्कार किए हुए हैं। बार संघ जिलाधिकारी को भी एसडीएम सदर के स्थानांतरण की मांग कर चुका है।
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चाय, खाने के लिए तरसे लोग
गुप्तकाशी। व्यापारियों के बाजार बंद के दौरान केदारघाटी के दूरदराज के गांवों से खरीदारी के लिए बाजार पहुंचे लोगों को मायूस लौटना पड़ा। चाय-खाने के लिए भी वे तरसते रहे। प्रदर्शन करने वालों में पूर्व प्रमुख ममता नौयिाल, पूर्व व्यापार संघ अध्यक्ष प्रेम सिंह नेगी, टैक्सी यूनियन के राय सिंह राणा, राजेंद्र सिंह नेगी, ग्राम प्रधान मदन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
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