समिति के महामंत्री विपिन सेमवाल का कहना है कि रविवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत कालीमठ घाटी के कविल्ठा गांव में आयोजित समारोह में शामिल होने पहुंचे, लेकिन उन्होंने आंदोलन स्थल पर पहुंचने की जहमत नहीं उठाई। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार जनहितों की कितनी परवाह करती है।
मुख्यमंत्री और उनके मंत्री केदारघाटी की जनता की उपेक्षा कर आंदोलन को निरंतर अनदेखा कर रहे हैं, जिसके उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेशभर में छोटे-छोटे मेलों में पहुंच रहे हैं, लेकिन जहां लोग जायज मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, उनकी नहीं सुन रहे हैं। इधर रविवार को रुद्रपुर के ग्रामीणों ने आंदोलन के समर्थन में अनशन स्थल पर धरना दिया।