पंतनगर। पंतनगर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पूटा) की हंगामेदार रही आम सभा (जीबीएम) में बदलते घटनाक्रम पर विचार विमर्श करते हुए शिक्षकों ने कार्य बहिष्कार जारी रखने का ऐलान किया। शिक्षकों ने कहा कि उनकी मांगें जायज हैं, जिन्हें शासन को पूरा करना ही होगा। उनको विवि प्रशासन से कोई शिकायत नहीं है। अब अपने हक के लिए शासन से आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। वहीं, शासन को मामले की गंभीरता से अवगत कराने कुलपति देहरादून रवाना हो गए हैं।
कृषि महाविद्यालय में एग्रोनॉमी के प्राध्यापक डॉ. टीपी सिंह ने कहा कि विवि में शिक्षक भर्ती मामले में जब पात्रता मापदंड अरैी सेलेक्शन प्रोसेस एक है तो वह अनियमित कैसे हो गए। उनको विवि ने नियुक्ति दी है, उनको आईसीएआर से क्या लेना-देना है। बताया कि शासन की इसी विसंगति के चलते अब तक हमारे दो शिक्षकों की आकस्मिक मृत्यु के बाद उनके आश्रितों को नियुक्ति नही दी गई। शासन और विवि में बैठे कुछ अधिकारी जानबूझ कर मामले को उलझा रहे हैं। अब गेंद शासन के पाले में है, वह तय करे कि उसे क्या निर्णय लेना है। फिलहाल कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। वहां डॉ. रोहिताश्व सिंह, डॉ. विनय कुमार सिंह, डॉ. डीसी बचखेती, डॉ. संदीप कुमार, डॉ. टीपी सिंह सहित पूटा के अन्य पदाधिकारी, शिक्षक और वैज्ञानिक मौजूद थे।
कुछ नियमित शिक्षकों ने बहिष्कार से किया इन्कार
पंतनगर। कार्य बहिष्कार कर रहे शिक्षकों का कुलपति की ओर से वेतन रोके जाने एवं प्रशासन के आदेश पर अधिष्ठाताओं व निदेशकों द्वारा विभाग प्रमुखों से कार्य बहिष्कार कर रहे शिक्षकों की सूची मांगे जाने से प्रौद्योगिकी व अन्य महाविद्यालयों के कुछ नियमित शिक्षक डर गए। उन्होंने कार्य बहिष्कार में भाग न लेने संबंधी पत्र पर हस्ताक्षर भी कर दिए। वहीं, निदेशक प्रशासन कर्मेंद्र सिंह व अपर निदेशक प्रशासन डॉ. प्रकाश भट्ट ने बताया कि उन्हें अभी ऐसा कोई पत्र नहीं मिला है।
पूटा के बैनर तले एकजुट हैं शिक्षक : पूटा
पंतनगर। पूटा महामंत्री डॉ. विनय कुमार सिंह ने बताया कि हंगामेदार रही जीबीएम में कुछ नियमित शिक्षकों ने कार्य बहिष्कार में भाग नही लेने की बात कही थी। साथ ही कुछ ने इसे क्रमिक अनशन में परिवर्तित करने का सुझाव दिया। अंतत: सभी शिक्षकों ने सर्वसम्मति से पूटा के बैनर तले एकजुट रहकर मांगें पूरी होने तक कार्य बहिष्कार जारी रखने का निर्णय लिया है।
शासन की ओर से आईसीएआर से पूछे गए शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 से 62 वर्ष करने, पे-स्केल आदि के जवाब में आईसीएआर ने शिक्षकों के पक्ष में शासन के वित्त सचिव को पत्र लिखकर सभी बिंदुओं पर स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा नहीं हो सकता है। विवि के जो नियम होंगे, वह उन पर लागू होंगे। अब गेंद शासन के पाले में है। - कर्मेंद्र सिंह (पीसीएस), निदेशक प्रशासन, पंतनगर विवि।
पंतनगर। हरित क्रांति की अलख जगाने वाला देश का पहला कृषि विवि, जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि करीब 15 दिनों से नियंत्रक विहीन है। इससे विवि में वित्तीय लेनदेन समेत समस्त भुगतान अटक गए हैं। मौजूदा परिस्थितियों से निपटने के लिए कुलपति के शासन को दिशा-निर्देश प्राप्त करने के लिए लिखे पत्र के बावजूद शासन का रवैया उदासीन पूर्ण है।
विवि में कुलपति एवं नियंत्रक के बीच अधिकारों को लेकर छिड़ी रार किसी से छिपी नहीं है। इससे आजिज आकर नियंत्रक जयंती हयांकी (पीसीएस वित्त) 23 दिसंबर को आठ दिन के लिए आकस्मिक अवकाश पर चली गईं। उन्होंने अपना प्रभार नियम विपरीत उप नियंत्रक डॉ. जेसी बडोला (वरिष्ठ) के बजाय उप नियंत्रक एसपी कुरील (कनिष्ठ) को सौंप दिया। इधर, कुलपति डॉ. तेज प्रताप ने नियंत्रक का अवकाश तो स्वीकृत किया लेकिन परंतु कनिष्ठ को प्रभार सौंपने पर आपत्ति जताते हुए उसे अस्वीकृत कर दिया। उधर, कुलपति की ओर से शासन में नियंत्रक को हटाकर अन्य किसी अधिकारी को विवि में नियंत्रक नियुक्त करने संबंधी भेजे गए पत्र पर तेजी से बदले घटनाक्रम के बाद नियंत्रक ने एक जनवरी को न तो कार्यभार ग्रहण किया और न ही किसी को प्रभार सौंपा और स्वास्थ्य अवकाश पर चली गईं। जिस पर कुलपति ने उसी दिन शासन को पत्र लिखकर बताया कि नियंत्रक न तो अवकाश से वापस आई और न ही को अवकाश का आवेदन प्राप्त हुआ है। अत: शासन मार्गदर्शन करे कि अब प्रभार किसके पास रहेगा, इसका शासन ने कोई जवाब नहीं दिया।