फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पहाड़ में धान की मड़ाई के लिए स्वचालित पैडी थ्रेशर इजाद

विज्ञापन
विज्ञापन
किसान मेले के विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा के स्टाल पर प्रदर्शित स्वचालित और विद्युत चालित वीएल पैडी थ्रेशर किसानों को काफी आकर्षित कर रहा है। इस थ्रेशर के उपयोग से पारंपरिक मड़ाई की तुलना में समय और श्रम की लागत काफी कम आती है।
विज्ञापन

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में धान की खेती करीब तीन लाख हेक्टेयर में की जाती है। इसमें करीब पांच लाख टन चावल का उत्पादन होता है। पहाड़ों में कृषि जोत का आकार 0.04 हेक्टेयर से कम और हर किसान परिवार की धान उपज दो सौ किलो से भी कम है।
कम उपज और कम आय होने से किसान अधिक कार्यक्षमता वाले महंगे मड़ाई यंत्र नहीं खरीद सकते हैं। इसके साथ ही पहाड़ की भौगोलिक विषमताओं के कारण उपलब्ध भारी थ्रेशरों को खेतों तक पहुंचाना जोखिम भरा होता है। इस क्षेत्रों में धान की मड़ाई डंडे से बालियों पर चोट कर या पैरों से मसल कर की जाती है। इसमें श्रम, श्रमिक और समय भी अधिक लगता है।
विज्ञापन

पर्वतीय किसानों की इस परेशानी को देखते हुए विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा ने स्वचालित और विद्युत चालित वीएल पैडी थ्रेशर ईजाद किया है। थ्रेसर का वजन क्रमश: 25 व 60 किलोग्राम है। इसकी प्रति घंटा थ्रेशिंग क्षमता 80 से 100 किलो प्रति घंटा एवं विद्युत चालित थ्रेशर की क्षमता की 100 से 120 किलो प्रति घंटा है। विद्युत चालित थ्रेशर में ऊर्जा की खपत आधी और थ्रेशिंग तीव्रता अधिक होती है। यह मजदूरों की जरूरत और लागत को कम करता है। साथ ही बीजों के नुकसान को बचाता है। इस यंत्र से उच्च गुणवत्ता युक्त उत्पाद प्राप्त होता है।
थ्रेशर हल्के वनज (पैडल चालित - 25 किग्रा) होने के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में कहीं भी ले जाया जा सकता है। तेजी से मड़ाई करने वाले इस यंत्र से श्रम की बचत होती है और मड़ाई व्यय कम आता है। पर्वतीय क्षेत्रों में परंपरागत मड़ाई में बर्बाद होने वाले अनाज की जगह इससे मड़ाई करने पर अनाज की बर्बादी नहीं होगी। इसकी मड़ाई में पुआल भी खराब नहीं होता और मशीन के ढांचे में पॉलीकार्बोनेट शीट का प्रयोग होने से इसमें जंक भी नहीं लगता है। - डॉ. सुदर्शन जोशी, वैज्ञानिक विवेकानंद अनुसंधान संस्थान।
ईंधन की जितनी खपत कम, उतनी अधिक कमाई
पंतनगर। किसान मेले में पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान संघ (पीसीआरए) का स्टाल किसानों, महिलाओं सहित अन्य लोगों को भी लुभा रहा है। यहां घर से खेत तक ईंधन बचत के तौर-तरीकों की जानकारी देकर लोगों को आय में वृद्धि की जानकारी दी जा रही है।
स्टाल पर मौजूद पीसीआरए के वैज्ञानिक डॉ. पीपी गौतम एवं डॉ. आरपी अवस्थी ने बताया कि महिलाएं घरों में आईएसआई मार्का एलपीजी चूल्हों, प्रेशर कुकर का उपयोग, चूल्हा जलाने, जल की उचित मात्रा प्रयुक्त करने, उबलने पर आंच धीमी करने, पकाने से पूर्व अनाजों को पानी में भिगोने, चौड़े आधार वाले बर्तनों का उपयोग, खाना ढक कर पकाने सहित अनेक विधियों से 30 प्रतिशत तक ईंधन की बचत कर सकती हैं।
इसी तरह आम जन अपने वाहनों में अधिक देर तक रुकने पर इंजन बंद कर देने, कार-पूल का उपयोग करने, एसी का उपयोग कम करने, बेहतर माइलेज के लिए टॉप गियर का प्रयोग, साइकिल चलाने या सार्वजनिक परिवहन प्रयोग करने सहित अन्य सावधानियों से 20-25 प्रतिशत ईंधन की बचत कर सकते हैं। संवाद
नई कृषि तकनीकों को देख चकित हुआ कश्मीरी दल
पंतनगर। कश्मीर के पुलवामा से भारतीय सेना के पांच जवानों के साथ किसान मेले में छात्रों और किसानों का 22 सदस्यीय दल पहुंचा है। दल में शामिल किसान शाहबाज अहमद एवं छात्र मो. फारूक, मो. रफीक और मो. कबीर ने बताया कि पर्वतीय क्षेत्र होने के चलते नके यहां कृषि की सीमित संभावनाएं हैं। बताया कि वे लोग खेती की नई तकनीकों, कृषि यंत्रों और उन्नतशील बीजों से रूबरू होने आए हैं। मेले से उन्हें बहुत सी उत्साहित करने वाली जानकारियां मिली हैं, जिन्हें अपने यहां अपनाकर खेती को नया आयाम देने की कोशिश करेंगे। इधर, मेले में विवेकानंद स्वाध्याय मंडल के स्टाल पर किसानों और मेलार्थियों को स्वामी विवेकानंद से जुड़ी जानकारी दी जा रही है। स्टाल पर विवेकानंद से जुड़े साहित्य भी उपलब्ध हैं। संवाद
फसल की कटाई के साथ गठरियां बांधेगा रीपर बाइंडर
पंतनगर। किसान मेले में लुधियाना की बीसीएस इंडिया के स्टाल पर इटालियन सेल्फ प्रोपेल्ड 4-व्हील रीपर बाइंडर प्रदर्शित किया गया है। यह रीपर बाइंडर यंत्र जमीन से दो इंच ऊपर फसल की कटाई के साथ तने की गठरियों को भी बांधने का कार्य करता है।
कंपनी प्रबंधक गुलबंद सिंह ने बताया कि इस यंत्र की सहायता से गेहूं, धान, जौ, जई और अन्य दाने वाली फसलों की कटाई के साथ ही बचे हुए तने की बंधाई भी की जा सकती है। यह 80 सेमी से 110 सेमी तक ऊंचाई वाली फसलों की कटाई में कारगर है। इसकी कार्य क्षमता तीन हेक्टेयर प्रति घंटा एवं इसके डीजल चालित एयरकूल्ड इंजन की क्षमता दस हॉर्स पावर है।
535 किग्रा वजनी एवं चार गियर आगे और एक पीछे वाला यह रीपर बाइंडर एक घंटे में एक एकड़ तक फसल की कटाई और बंधाई कर सकता है। इसके कटरबार की चौड़ाई चार फिट है। कंपनी ने इसके अलावा सेल्फ प्रोपेल्ड 3-व्हील रीपर बाइंडर, ट्रैक्टर माउंटेड रीपर बाइंडर, 3/4 व्हील वर्टिकल कनवेयर रीपर, 3-व्हील फोडर हार्वेस्टर और डिस्क मूवर रोटैक्स-5 नामक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन भी किया है। रीपर बाइंडर की कीमत 5.10 लाख रुपये है। इस पर कृषि विभाग की ओर से ढाई लाख की सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है।
पुष्प उत्पादन पर प्रशिक्षण का समापन
पंतनगर। विवि के प्रसार शिक्षा निदेशालय की प्रशिक्षण इकाई की ओर से पुष्प उत्पादन पर हिमाचल प्रदेश के प्रगतिशील किसानों का हिमालय पुष्प क्रांति योजना के तहत पांच दिवसीय प्रशिक्षण का बृहस्पतिवार को समापन हो गया। निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि कृषक अपनी आय दोगुनी तभी कर सकते हैं, जब वह कृषि के साथ मुर्गी पालन, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन एवं बैमौसमी सब्जी उत्पादन आदि को अपनाएं। व्यवसायिक पुष्प उत्पादन की हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं।
प्रभारी प्रशिक्षण डॉ. एसके बंसल ने कहा कि बेमौसमी पुष्प उत्पादन कर किसान अधिक लाभ कमा सकते हैं। सिरमौर, हिमाचल प्रदेश से आए उद्यान विकास अधिकारी डॉ. रितेश शर्मा ने बताया कि प्रशिक्षणार्थियों के लिए यह कार्यक्रम बहुत उपयोगी रहा। पुष्प उत्पादन के साथ किसानों को मेले से भी भरपूर जानकारी प्राप्त हुई। प्रशिक्षण में डॉ. रंजन श्रीवास्तव, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. अजीत कुमार, डॉ. वीके राव, डॉ. सतीश चंद्र शर्मा, डॉ. प्रमोद मल्ल एवं डॉ. केपीएस कुशवाहा की ओर से व्याख्यान दिए गए और प्रक्षेत्र भ्रमण भी कराया गया। प्रशिक्षण में सिरमौर हिमाचल प्रदेश़ के 19 किसानों ने प्रतिभाग किया। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें