अगस्त्यमुनि। प्रसिद्ध कथा वाचक मुरारी बापू की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हरीश रावत के सामने अपनी समस्याआें को लेकर दूर-दूर से फरियादी पहुंचे। हालांकि किसी को मिलने का मौका मिला तो कोई बैरंग ही लौट गया।
अगस्त्यमुनि क्रीड़ा मैदान में बीरों (बसुकेदार) की गायत्री देवी मुख्यमंत्री को अपनी पीड़ा सुनाते-सुनाते फफक-फफक कर रो पड़ी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष जनवरी माह में उसके 35 वर्षीय बेटे राजेंद्र लाल की आकस्मिक मौत हो गई थी। बेटे के गम में दो माह बाद ही उसके पिता की भी मौत हो गई। अब उनके सामने बहू और दो बच्चाें को पालने की चिंता सताने लगी है। बताया कि कई बार गुहार लगाने के बाद भी कोई मदद नहीं मिली है। केदारनाथ आपदा में पति गंवाने वाली विकलांग आरती जोशी भी मदद की उम्मीद में दिल्ली से यहां पहुंचीं। आरती अपने छह वर्षीय बेटे नितिन के साथ कभी मुख्यमंत्री को कभी मुरारी बाबू को अपना दुखड़ा सुनाती रहीं। यहां भी उसे केवल आश्वासन ही मिला। गडगू के विजयपाल सिंह भी अपनी फरियाद के लेकर पहुंचे थे, लेकिन सीएम से न मिल पाने की मायूसी उनके चेहरे पर साफ दिख रही थी।
स्पष्ट मापदंड बताए न जाने से परेशान रहे लोग
अगस्त्यमुनि। आयोजकाें की ओर से आर्थिक मदद देने के स्पष्ट मापदंड न बताए जाने से लोग परेशान रहे। दूर दराज से आए लोग इस बात से भी खफा दिखे कि उन्हें बुलाया गया, लेकिन उनका नाम सूची में नहीं था। चंद्रापुरी क्षेत्र की महिलाआें ने इस संबंध में आयोजकों को खरी खोटी भी सुनाईं। वहीं गौरीकुंड के कुछ व्यापारियाें ने विधायक के सम्मुख भी अपनी आपत्तियां रखीं। विधायक ने बताया कि यह सूची लुक सोसाइटी ने सर्वे के बाद तैयार की है।