रुद्रप्रयाग। केदारनाथ में दिनभर रुक-रककर बर्फबारी होती रही। धाम में दो फीट नई बर्फ जम चुकी है, जबकि पहले से साढ़े सात फीट बर्फ मौजूद है। द्वितीय केदार मद्महेश्वर, तृतीय केदार तुंगनाथ सहित चोपता, दुगलबिट्टा, गौंडार, रांसी, त्रियुगीनारायण, चौमासी, चिलौंड, हरियाली डांडा में बर्फबारी हुई है। इधर, निचले इलाकों में दोपहर बाद से रुक-रुककर बारिश हो रही है, जिससे कड़ाके की ठंड पड़ रही है।
बृ़हस्पतिवार तड़के से केदारनाथ में बर्फबारी शुरू हो गई थी, जो देर शाम तक होती रही। पूरे दिन यहां चारों तरफ घना कोहरा छाया रहा। बीते 10 दिनों से केदारनाथ सहित जनपद का मौसम आए दिन बदल रहा है। धाम में पुनर्निर्माण कार्य ठप हैं। बीते पांच दिनों में धाम से 60 लोग वापस लौट चुके हैं। अब, वहां 21 लोग रह रहे हैं, जिसमें 11 मजदूर, 4 पुलिस कर्मी और 6 साधु हैं। धाम में मौजूद वुड स्टोन कंपनी के प्रभारी कैप्टन सोबन सिंह ने बताया कि बर्फबारी के चलते पुनर्निर्माण कार्यों के पुन: शुरू होने की उम्मीदें फिर से धूमिल हो गई हैं। उन्होंने बताया कि धाम में बीते 21 जनवरी से बिजली और संचार सेवा ठप हैं। साथ ही पानी के पाइप भी बर्फ से जम चुके हैं, जिस कारण बर्फ पिघलाकर पानी पीना पड़ रह है। धाम में अधिकतम तापमान 7 डिग्री और न्यूनतम माइनस 4 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके अलावा जनपद के अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी दिनभर रुक-रुककर जमकर बर्फबारी होती रही। जबकि जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग सहित अन्य घाटी क्षेत्रों में दोपहर बाद से रुक-रुककर बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। बाजारों में चहलकदमी सीमित रही।
अभी नहीं हुई बिजली सप्लाई बहाल
रुद्रप्रयाग। बर्फ प्रभावित त्रियुगीनारायण, तोष, चौमासी आदि गांवों में भी बिजली सप्लाई बहाल नहीं हो पाई है। ऐसे में ग्रामीणों के दैनिक कार्य भी व्यापक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। अधिकांश लोगों के मोबाइल फोन सेट बिना चार्ज के डेड पड़े हुए हैं। ग्रामीण शिव प्रसाद सेमवाल ने बताया कि ऊर्जा निगम के अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी विद्युत व्यवस्था बहाल नहीं हो पाई है। दूसरी तरफ कुंड-ऊखीमठ-चोपता-मंडल-गोपेश्वर राजमार्ग सहित पलद्वाड़ी-मक्कूमठ, सोनप्रयाग-त्रियुगीनारायण आदि मार्ग भारी बर्फ के चलते अवरूद्ध पड़े हैं। इस हालात में ग्रामीणों को बाजारों तक पहुंचने के लिए मीलों पैदल नापना पड़ रहा है।