ऊखीमठ। द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर के कपाट 21 मई को सिंह लग्न में सुबह 11.30 बजे और तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट मिथुन लग्न में 2 मई को सुबह 10.30 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
बैसाखी पर शनिवार को पंचकेदार गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में सुबह सात बजे से पूजा-अर्चना शुरू हो गई थी। द्वितीय केदार के लिए नियुक्त पुजारी शिव शंकर लिंग ने भगवान मद्महेश्वर के भोग मूर्ति का श्रृंगार कर पूजा करते हुए आरती की। इसके बाद अन्य धार्मिक औपचारिकताएं पूरी की गई। सुबह 9 बजे ओंकारेश्वर मंदिर के वेदपाठी यशोधर मैठाणी एवं विश्वमोहन जमलोकी ने पंचांग गणना के आधार पर द्वितीय केदार मद्महेश्वर धाम के कपाट खुलने की तिथि सिंह लग्न में सुबह 11.30 बजे घोषित की। पंचांग गणना के आधार पर द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर की भोग मूर्ति के चल विग्रह उत्सव डोली में विराजमान होने व धाम प्रस्थान कार्यक्रम भी घोषित किया गया। वहीं मार्केण्डेय मंदिर मक्कूमठ में पुजारी विजय भारत मैठाणी व आचार्यगणों की ओर से तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि मिथुन लग्न में 2 मई सुबह 10.30 बजे तय कर घोषणा की गई। इस मौके पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ आराध्य का श्रृंगार कर भोग लगाया गया। कार्यक्रम में मठापति राम प्रसाद मैठाणी, मंदिर के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित, भगवती प्रसाद मैठाणी, भूपेंद्र मैठाणी, जीतपाल भंडारी, केवलानंद मैठाणी आदि थे।
द्वितीय केदार मद्महेश्वर भगवान का डोली प्रस्थान कार्यक्रम
18 मई >> भगवान मद्महेश्वर की भोग मूर्ति शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर के गर्भगृह से सभामंडप में होगी विराजमान।
19 मई >> द्वितीय केदार की चल विग्रह उत्सव डोली अपने धाम के लिए प्रस्थान करते हुए राकेश्वरी मंदिर रांसी में रात्रि प्रवास करेगी।
20 मई >> डोली जनपद के अंतिम गांव गौंडार में रात्रि प्रवास करेगी।
21 मई >> द्वितीय केदार की उत्सव डोली प्रात: 6 बजे धाम के लिए प्रस्थान करते हुए बणतोली, खुन्नू, खडरा होते हुए प्रात: 11 बजे धाम पहुंचेगी। सुबह 11.30 बजे सिंह लग्न में धाम के कपाट खोले जाएंगे।
>> तृतीय केदार तुंगनाथ भगवान का डोली प्रस्थान कार्यक्रम
30 अप्रैल >> भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली भूतनाथ मंदिर मक्कू पहुंचेगी।
1 मई >> डोली भूतनाथ मंदिर से प्रस्थान कर रात्रि प्रवास को चोपता पहुंचेगी।
2 मई >> प्रात: 7 बजे डोली धाम के लिए प्रस्थान करेगी। जहां पर विधि-विधान के साथ मिथुन लग्न में प्रात: 10.30 बजे कपाट खोले जाएंगे।
पुष्पक विमान में विराजमान हुए भगवान मद्महेश्वर
ऊखीमठ। पंचकेदार शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर में द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर की भोग मूर्ति को गर्भगृह से सभामंडप में विराजमान किया गया। इस मौके पर पुजारी शिव शंकर लिंग ने भोगमूर्ति का श्रृंगार कर आरती की और फूलों से बनाए पुष्पक विमान में विराजमान किया। दोपहर बाद दो बजे पुष्पक रथ में विराजमान भोग मूर्ति को उतारकर ओंकारेश्वर मंदिर की सात परिक्रमा के बाद गर्भगृह में स्थापित कर दिया गया। पुष्पक विमान के फूलों को प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को वितरित किया गया। इस मौके पर कार्याधिकारी एनपी जमलोकी, प्रशासनिक अधिकारी राजकुमार नौटियाल, वचन सिंह रावत, रमेश तिवारी, युद्धवीर पुष्पवाण, आचार्य हर्ष जमलोकी, पूर्व प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद भट्ट, पुष्कर रावत, विक्रम रावत सहित कई लोग मौजूद थे।