गुप्तकाशी। जिला संस्कृत भारती के तत्वावधान में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार व प्रोत्साहन के लिए संस्कृत सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें संस्कृत को बचाने और इसे आम बोलचाल की भाषा बनाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में 22 विद्यालयों से 570 छात्रों ने शिरकत की।
गुप्तकाशी में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे मुख्य अतिथि बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य वाचस्पति सेमवाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत को देव भाषा का दर्जा दिया गया है। यह भाषा हमारी संस्कृति व विरासत की परिचायक है, लेकिन वर्तमान समय में संस्कृत भाषा की हो रही उपेक्षा के चलते यह भाषा हाशिये पर जाती दिख रही है। इसे संरक्षण के लिए सभी को एकजुट होकर आगे आने की जरूरत है। सभी की सहभागिता से ही इस भाषा को विलुप्त होने से बचाया जा सकता है। विशिष्ट अतिथि सर्वेश भट्ट, कार्यक्रम के अध्यक्ष बुद्धदेव शर्मा, संजय ध्यानी, बीना गौड, देवानंद सेमवाल आदि ने भी विचार व्यक्त किए। बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी। ब्यूरो