मतदान को लेकर जहां युवा उत्साहित थे वहीं बुजुर्ग भी किसी से पीछे नहीं थे। कोई बैसाखी लेकर तो कोई परिजनों का सहारा लेकर वोट डालने पहुंचा। उनका कहना था कि बैलट पेपर की भले ही सुविधा प्रशासन ने उन्हें दी हो लेकिन जो मजा मतदान केंद्र पर ईवीएम से वोट डालने का है वह बैलेट पेपर से नहीं आ सकता।
जिले के 11 विधानसभा क्षेत्रों में सोमवार को मतदान हुआ। वोट डालने के लिए केंद्रों पर लोगों की लंबी लाइनें लगी रहीं। एक तरफ जहां युवा वर्ग मतदान के प्रति उत्साहित रहा वहीं बुजुर्ग वोटर भी कहीं कमतर नजर नहीं आए। भले ही वे चलने में असमर्थ थे लेकिन बैसाखी, व्हीलचेयर और परिजनों का सहारा लेकर वोट डालने केंद्रों तक पहुंचे।
शेरपुर स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में बने मतदान केंद्र पर राजेंद्र सैनी (92) ने मतदान किया। वहीं व्हीलचेयर पर पहुंचे बुजुर्ग विजय शुक्ला ने भी अपने मत का प्रयोग किया। वहीं रामनगर स्थित प्राथमिक विद्यालय नंबर 18 में पहुंची 93 वर्षीय गीता देवी और 90 वर्षीय विशाखा गुप्ता मतदान केंद्र पर पहुंचीं। उन्होंने कहा कि भले ही अब उनका प्रतिनिधि उनके मोहल्ले में न आए लेकिन लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए उन्होंने एक कुशल प्रत्याशी को वोट दिया है।
उधर, रुड़की के बीएसएम इंटर कॉलेज में लगे मतदान केंद्र पर पहुंची 97 वर्षीय प्रेमवती ने बताया कि पांच साल में एक बार हमें अपना प्रतिनिधि चुनने का मौका मिलता है इस कारण केंद्र पर पहुंचकर अपने मत का प्रयोग किया। जीआईसी स्थित मतदान केंद्र पर अपने दो पोतों के कंधों पर वोट डालने के लिए पहुंचे सुखपाल सिंह चलने में असमर्थ थे। जब उनसे पूछा गया कि वह बैलेट पेपर से भी वोट दे सकते थे, इस पर उनका जवाब दिल छू जाने वाला था। उनका कहना था कि अब उम्र का आखिरी पड़ाव है। शायद दूसरी बार वोट डालने का मौका न मिले इसलिए मतदान केंद्र पर वोट डालने के लिए आए हैं। जो मजा मतदान केंद्र पर ईवीएम मशीन पर वोट देने का है, वह बैलेट पेपर में नहीं है।
100 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों ने डाला वोट
मंगलौर में पोलिंग बूथों पर सौ वर्ष की आयु पूरी कर चुके कई मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने पहुंचे। सभी मतदान केंद्रों पर दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाताओं के लिए व्हीलचेयर का प्रबंध भी किया गया था। पठानपुरा निवासी बतूल का कहना है कि पांचवीं पीढ़ी में पहुंचने के बाद भी मतदान के प्रति उनका उत्साह कम नहीं हुआ है। 114 वर्ष की आयु में भी मतदान करते समय 18 वर्ष की आयु जैसो एहसास होता है। लिब्बरहेड़ी के जरीफन का कहना है कि जब से उनका वोट बना था इसी उत्साह के साथ मतदान कर रही हूं। जैसे पहली बार वोट डाल रही हूं।