रुड़की। शर्तों में ढील के साथ एक बार फिर रुड़की में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। नई शर्तों के तहत अब रुड़की कलस्टर का कूड़ा ही प्लांट तक लाया जाएगा। इससे पहले हरिद्वार तक का कूड़ा प्लांट तक लाने की योजना थी। इसके चलते इस बार प्लांट के निर्माण को हरी झंडी मिलने की उम्मीद जगी है। दो मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता के प्लांट में रोजाना करीब 200 मीट्रिक टन कूड़े का निपटान होगा।
गौरतलब है कि रुड़की में पिछले करीब सात साल से कूड़े से बिजली बनाने वाले प्लांट को स्थापित करने की कवायद चल रही है। टेंडरों के जरिए इस प्लांट को लगाने के लिए कई कंपनियों को आमंत्रित किया जा चुका है, लेकिन हर बार नियम व शर्तों के अलावा कई किलोमीटर दूर नगर निकायों से कूड़ा लाने के झंझट के चलते कंपनियां मुंह फेर रही थीं। शहरी विकास निदेशालय स्तर से इस पर कई दौर की बैठकों में विशेषज्ञों से राय ली गई। इसके बाद नियम और शर्तों में संशोधन किया गया। अब फिर से इसका टेंडर जारी कर दिया गया है। माना जा रहा है कि इस बार कंपनियां टेंडर में रुचि दिखाएंगी। नगर आयुक्त नूपुर वर्मा ने बताया कि दो मेगावाट क्षमता के प्लांट में रोजाना करीब 200 मीट्रिक टन कूड़े का निपटारा किया जाएगा। इसमें रुड़की नगर निगम क्षेत्र से रोजाना निकलने वाला 104 मीट्रिक टन कूड़ा भी शामिल होगा। उन्होंने बताया कि प्लांट में रुड़की कलस्टर में शामिल लक्सर, मंगलौर, लंढौरा, झबरेड़ा, पिरान कलियर और भगवानपुर नगर निकायों का कूड़ा भी लाया जाएगा। इसके लिए पहले प्री बिड मीटिंग होगी। इसमें कंपनी के प्रतिनिधियों को जानकारी दी जाएगी। इसके बाद टेंडर को खोला जाएगा। नवंबर के दूसरे सप्ताह तक प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
-----------------
स्वच्छता के अंक में होगी वृद्धि
स्वच्छ भारत अभियान के तहत केंद्र सरकार की ओर से हर साल जारी होने वाली स्वच्छता रैकिंग में भी रुड़की नगर निगम को इस प्लांट का लाभ मिलेगा। अभी तक रुड़की निगम के पास कूड़ा निपटारे के साधन नहीं हैं। सालियर स्थित निगम की सैकड़ों बीघा जमीन में कई वर्षों से कूड़े को डंप किया जा रहा है। इससे यहां कूड़े के पहाड़ बन गए हैं। ऐसे में प्लांट लगने से कूड़ा निपटारे की समस्या का समाधान हो सकेगा।