स्वास्थ्य विभाग की ओर से सिविल अस्पताल ले लगाए गए दिव्यांग शिविर में स्टाफ के देरी से पहुंचने से दिव्यांगों और उनके परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। गुस्साए लोगों ने शिविर में अधिकारियों के आते ही हंगामा करना शुरू कर दिया। लोगों का कहना था कि वे सुबह आठ बजे से रजिस्ट्रेशन का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन शिविर में कोई जिम्मेदार नहीं पहुंचा। बाद में डॉक्टर के पहुंचने पर दिव्यांगों का गुस्सा शांत हुआ।
मंगलवार को सिविल अस्पताल में दिव्यांगों के प्रमाणपत्र बनाने के लिए दिव्यांग शिविर का आयोजन किया गया था। दिव्यांग सुबह से ही अस्पताल में पर्चा बनवाकर शिविर के स्थान पर पहुंच गए थे। इसके बाद दिव्यांग और उनके परिजन शिविर में अधिकारियों के आने का इंतजार करने लगे। इस दौरान वहां लोगों के पर्चे एकत्र कर लिए गए और लोगों को इंतजार करने को कहा गया। दो घंटे तक किसी के नहीं पहुंचने से लोगों का धैर्य जवाब देने लगा। इसके बाद करीब 11 बजे स्टाफ के लोग पहुंचे तो वे दरवाजे के गेट पर भीड़ देखकर भड़क गए। उन्होंने इंतजार में बैठे दिव्यांगों को सीढ़ी से उठाकर बाहर खड़ा कर दिया और सबके पर्चे वापस करवा दिए। इससे वहां मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। वहीं पर्चे वापस कराए जाने से जो लोग सबसे पहले आए थे, वे लाइन में सबसे पीछे चले गए। ऐसे में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। आदर्शनगर से पहुंचे बलवंत सिंह और मेहरबान का कहना था कि वे सुबह नौ बजे शिविर में पहुंच गए थे। जब यहां पहुंचे तो कोई जानकारी देने वाला नहीं था। ऐसे में वे दो घंटे से अधिकारियों के आने का इंतजार कर रहे हैं। मंगलौर निवासी शोएब, लिब्बरहेड़ी निवासी मासूम, रामपुर से फातिमा और नारसन से गजेंद्र सिंह ने कहा कि आठ बजे से वे अधिकारियों के आने का इंतजार कर रहे हैं। 11 बजे शिविर में एक अधिकारी पहुंचे और लोगों पर बरसना शुरू कर दिया। आरोप लगाया कि शिविर में अपने दिव्यांग बेटे को लेकर बैठी एक महिला को जबरन उठाकर बाहर भेज दिया गया। जो रजिस्ट्रेशन का काम सुबह नौ बजे करना था, उसे 11 बजे शुरू किया गया। कहा कि यदि प्रमाणपत्र नहीं बनाने थे तो दिव्यांगों को परेशान क्यों किया गया। इस दौरान शिविर में पहुंचे डॉ. राजकुमार ने दिव्यांगों और उनके परिजनों को समझाया। इसके बाद लोगों ने लाइन में लगकर रजिस्ट्रेशन कराया। इस दौरान शिविर में दोपहर दो बजे तक 60 लोगों के दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाए गए।
शिविर में नहीं थे ईएनटी चिकित्सक
दिव्यांग शिविर में लोग करीब 11 बजे तक लाइन में लगे रहे। इसके बाद उन्हें बताया गया कि आंखों की दिक्कत वाले मरीजों को अस्पताल के अंदर डॉक्टरों को दिखाना है। वहां चेकअप के बाद शिविर में प्रमाणपत्र जारी होगा, जबकि कान और नाक के डॉक्टर भी शिविर में नहीं थे। ऐेसे में इनसे संबंधित मरीजों को अस्पताल में भेजा जा रहा था। इस व्यवस्था पर भी दिव्यांगों ने एतराज जताया। उनका कहना था कि शिविर में ईएनटी के डॉक्टर भी मौजूद रहने चाहिए थे।
शिविर का समय 10 बजे था, इसलिए लोगों को समय से पहले नहीं, बल्कि समय पर पहुंचना चाहिए था। शिविर में दो डॉक्टर तैनात किए गए थे। आंखों के मरीजों को अस्पताल में इसलिए भेजा जा रहा था कि मशीनें सभी अस्पताल में ही रखी गई हैं। पर्चे जमा करने के लिए एक स्टाफ के सदस्य को नौ बजे भेज दिया गया था, वहां कोई मौजूद क्यों नहीं था, इसकी जांच करवाई जाएगी।
-डॉ. संजय कंसल, सीएमएस, सिविल अस्पताल