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हरिद्वार बचाओ की लहर में बॉडी के सिर पर सजा था सांसद का ताज

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पूर्व सांसद राजेंद्र बॉडी वर्ष 2004 में पहली बार सपा से जीतकर हरिद्वार के सांसद बने थे। उन्होंने भाजपा से तीन बार सांसद रहे हरपाल साथी को हराया था। बताया जाता है कि उत्तराखंड गठन के दौरान सपा की ओर से हरिद्वार जिले को उत्तराखंड से बाहर करने के लिए बड़ा अभियान चलाया गया था। इसमें राजेंद्र बॉडी एक जाना-माना चेहरा थे। इसी वजह से उनके सिर पर सांसद का ताजा सजा था।
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सोमवार शाम दिल्ली में पूर्व सांसद राजेंद्र बॉडी ने हाथी की सवारी छोड़कर हाथ थाम लिया है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में चुनावी चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। राजेंद्र बॉडी ने भले ही कांग्रेस का दामन थाम लिया हो, लेकिन इससे पहले वह सपा से हरिद्वार सांसद रह चुके हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उत्तराखंड गठन के समय सपा की लहर चल रही थी। सपा ने उत्तराखंड में हरिद्वार जिले के शामिल होने का कड़ा विरोध किया था। इसके लिए सपा के पूर्व विधायक स्व. अम्बरीष कुमार, पूर्व विधायक राम सिंह सैनी और राजेंद्र बॉडी ने हरिद्वार बचाओ संघर्ष अभियान छेड़ा था। हरिद्वार जिले को उत्तराखंड से बाहर करने में ये तीनों सपा के बड़े चेहरे थे। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि संघर्ष काम आया और सपा से हरिद्वार ने राजेंद्र बॉडी को सांसद पहुंचाया। इतना ही इस संघर्ष की आंधी में भाजपा से तीन बार सांसद रहे हरपाल साथी को हार का मुंह देखना पड़ा था।
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कई बार विस चुनाव लड़े, पर नहीं जीते
पूर्व सांसद राजेंद्र बॉडी ने कई बार विधानसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन जीत नहीं मिल पाई। इस बीच उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया और करीब दो साल पूर्व रुड़की नगर निगम का मेयर का चुनाव लड़ा था, लेकिन यहां भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। अब कांग्रेस का दामन थामने पर शहर की राजनीति में हलचल शुरू हो गई है। चर्चा है कि राजेंद्र बॉडी को कांग्रेस में शामिल कर चुनाव से पहले पार्टी कोई बड़ा पत्ता फेंकने की तैयारी कर रही है।
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