नगर निगम ने सिविल लाइंस स्थित एक दुकान से कब्जा हटाकर उसे मूल स्वामी को सौंपने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। विधिक राय के बाद लिए गए इस निर्णय का असर अब अन्य मामलों पर भी पड़ना तय है।
सिविल लाइंस स्थित चाट बाजार के सामने वर्ष 1994 में निगम की एक दुकान पनियाला निवासी परमानंद को किराये पर आवंटित की गई थी। समय के साथ उनके भाई भूपेंद्र वहां कामकाज देखने लगे। आरोप है कि भूपेंद्र ने बिना किसी वैधानिक अनुमति के उक्त दुकान करीब 10 लाख रुपये में विकास सैनी को सौंप दी। मामले की शिकायत मिलने के बाद नगर निगम ने विकास सैनी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई।
बाद में विकास सैनी की ओर से निगम को बताया गया कि उसका दुकान से कोई लेना-देना नहीं है। इसके बाद निगम प्रशासन ने भूपेंद्र से दुकान से जुड़े वैध दस्तावेज मांगे लेकिन वह कोई अधिकृत कागजात प्रस्तुत नहीं कर सके। पूरा मामला संदिग्ध होने पर नगर निगम ने विधिक राय ली। कानूनी विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि दुकान से अवैध कब्जा हटाकर उसे मूल किरायेदार को वापस सौंपने में कोई कानूनी बाधा नहीं है।
इसके बाद निगम प्रशासन ने कब्जा हटाने और दुकान परमानंद को सौंपने के आदेश जारी कर दिए। मंगलवार को कार्रवाई प्रस्तावित थी लेकिन अधिकारियों की व्यस्तता के कारण इसे फिलहाल स्थगित कर दिया गया। नगर आयुक्त राकेश चंद्र तिवारी ने बताया कि पूरी कार्रवाई विधिक राय के आधार पर की जा रही है और निगम की संपत्तियों पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।