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लाल सड़न कैंसर रोग से गन्ने की फसल हो रही बर्बाद

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लक्सर क्षेत्र में गन्ने में लगा रोग। - फोटो : ROORKEE
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जिले के किसानों के गन्ने की फसल में फैल रहे रेड रॉट (लाल सड़न कैंसर रोग) ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसकी वजह से किसानों के खेतों में खड़ी गन्ने की फसल बर्बाद हो रही है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिक और शुगर मिल के अधिकारी किसानों को 0118 और 085 प्रजाति के गन्ने की बुवाई करने की सलाह दे रहे हैं। इसके अलावा कृषि वैज्ञानिक किसानों को गन्ने की बुवाई करने से पहले उसके बीच का उपचार करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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जिले के किसानों की सबसे पसंदीदा फसल गन्ना है। यहां के किसान सबसे ज्यादा गन्ने की बुआई करते हैं। यही वजह है कि हरिद्वार को प्रदेश में गन्ना बेल्ट के नाम से जाना जाता है। वर्तमान में 54 हजार हेक्टेयर में गन्ने की फसल उगाई गई है, लेकिन कुछ दिनों से गन्ने की फसल में लगे रेड रॉट (लाल सड़न कैंसर) रोग ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी है। शुगर मिल के गन्ना महाप्रबंधक पवन ढींगरा ने बताया कि .0238 प्रजाति के गन्ने में अनुवांशिक कारणों के चलते गन्ने में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से रेड रॉट (लाल सड़न कैंसर रोग) हो रहा है। ऐसे में किसानों को इस प्रजाति प्रजाति के गन्ने की बुआई से बचना चाहिए। किसानों को इसके स्थान पर .0118 और 085 प्रजाति के गन्ने की बुवाई करनी चाहिए। जिस खेत में लाल सड़क कैंसर का प्रकोप हो, वहां फसल चक्र अपनाकर गन्ने की जगह दूसरी फसल की बुवाई करें। बताया कि इस रोग के लक्षण गन्ने की फसल में अप्रैल में दिखने लगते हैं। इस रोग में पत्तियों पर धारी के बीच में भूरे रंग की रुद्राक्ष माला जैसे धब्बे बन जाते हैं। वहीं बरसात में यह रोग बहुत तेजी से फैलता है और रोग ग्रस्त पौधे की तीसरी व चौथी पत्ती सूखने लगती है। धीरे-धीरे पौधे का अगोला भी सूख जाता है। बताया कि गन्ना सूखने पर यह सिरके की तरह गंध देता है। इससे गन्ने की सारी फसल नष्ट हो सकती है। यह रोग बीज जनित एवं भूमि जनित है। जिस पौधे में यह लक्षण दिखाई दे तो उनको उखाड़कर जला दें और उखाड़े गए स्थान पर ब्लीचिंग पाउडर डालकर मिट्टी से ढक दें।
गन्ना बुआई से पहले जमीन का उपचार
कृषि वैज्ञानिक केंद्र धनौरी के प्रभारी पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि गन्ने की बुआई से पहले जमीन और गन्ने के बीच का उपचार करना जरूरी है। किसानों को चाहिए कि गन्ना बुवाई से पहले ट्राईकोडर्मा की दो से ढाई लीटर मात्रा को प्रति एकड़ के हिसाब से 25-30 किलो गोबर की खाद में मिलाकर गन्ने की बुवाई से पहले मिट्टी में मिला दें। इसके अतिरिक्त हेक्सास्टॉप से गन्ने का बीज उपचारित करके ही बुवाई करें। यह दवाइयां किसानों को आसानी से बाजार में मिल जाती हैं।
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