ऐसी मान्यता है कि देश- विदेश से आने वाले अकीदतमंदों की साबिर पाक की दरगाह पर मत्था टेकते ही सभी दु:ख दर्द दूर हो जाते हैं। मन में पूरी पाकीजगी के लिए जायरीनों के जत्थे यहां आते हैं। रुहानी सुकून, भाईचारगी और पुरअमनी से लबरेज होकर यहां से जाते हैं। इस दौरान मुल्क के दीगर हिस्सों से आए कव्वाल अपने कलामों से पूरे माहौल को सूफियाना बना देते हैं।
साबिर पाक के उर्स के मौके पर कई जगहों से कव्वाल पहुंचते हैं। मजारे मुकद्दस के इर्द गिर्द मुख्तलिफ मकामात पर मुख्तलिफ वक्तों में उर्स के दिनों में बराबर कव्वाली होती रहती है। इन कव्वालियों में ज्यादातर हजरत साबिर पाक और सिलसिला चिश्तिया की तारीफ में अशआर व कलाम पढ़े जाते हैं। इन कव्वालियों में इतना रस घुला होता है कि हर कोई उसमे डूबा नजर आता है। साबिर पाक की खिदमत में अकीदतमंद अपना सर झुका रहे हैं। 11 दिसंबर को पडने वाली छोटी रोशनी में शरीक होने के लिए कलियर शरीफ में जायरीनों का जत्था उमड़ने लगा है। हजारों अकीदतमंद लाइन में लगकर साबिर पाक की दरगाह पर चादर चढ़ाकर अमनों अमान की दुआ मांग रहे हैं।
पाक जायरीनों ने पेश की खराजे अकीदत
साबिर पाक के सालाना उर्स पर पाक जायरीनों ने शनिवार को दरगाह अब्दाल साहब व शाह मंजर एजाज साबरी के मजार पर चादर पेश कर खराजे अकीदत पेश किया। नायब सज्जादा नशीन शाह अली मंजर एजाज ने अमनों अमान की दुआ करते हुए सभी पाक जायरीनों की दस्तार बंदी की। सभी पाक जायरीनों ने इस मौके पर दोनों मुल्कों के बीच अमनों अमान के लिए भी दुआ की। इस अवसर पर यावर अली एजाज, शाह सुहैल, नोमी इरशाद, गुड्डू साबरी, यासिर एजाज, बब्बू शाह, राजी मियां एवं गाजी मियां आदि उपस्थित रहे।