एक ओर रुड़की-लक्सर मार्ग का चौड़ीकरण कर बालावाली होते हुए यूपी से जोड़ने की योजना को केंद्र सरकार हरी झंडी दे चुकी है तो वहीं इस मार्ग पर ढंडेरा में रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण सेना की जमीन के अधिग्रहण में फंसकर रह गया है। वर्ष 2018 में केंद्र से स्वीकृति मिलने के बाद से अब तक सेना ने अपनी जमीन पर अप्रोच रोड बनाने की अनुमति नहीं दी है।
रुड़की-लक्सर जहां एक ओर हरिद्वार जाने के लिए वैकल्पिक मार्ग है तो वहीं दूसरी ओर लक्सर से बालावाली के बाद यह मार्ग यूपी से जुड़ता है। इसी के चलते हाल ही में केंद्र सरकार ने इसके चौड़ीकरण को मंजूरी दी है, लेकिन तीन साल पहले केंद्र सरकार की ओर से इस मार्ग पर ढंडेरा में रेलवे ओवरब्रिज को दी गई मंजूरी खटाई में पड़ती नजर आ रही है। दिक्कत यह है कि रेलवे फाटक के एक ओर सैन्य क्षेत्र आ रहा है। पीडब्ल्यूडी को सैन्य क्षेत्र की जमीन रेलवे विभाग को हस्तांतरित करनी है। इस बाबत जून 2021 में एनएच, पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता जीत सिंह रावत ने बीईजी एंड सेंटर मुख्यालय को पत्र भेजकर बताया है कि इस कार्य की मॉनिटरिंग मुख्यमंत्री और लोनिवि के प्रमुख सचिव कर रहे हैं और भूमि हस्तांतरण यथाशीघ्र आवश्यक है। इससे पूर्व भी जिलाधिकारी एवं विभागीय स्तर से सेना के अधिकारियों को पत्र भेजे जा चुके हैं। यही नहीं, एक साल पूर्व जिलाधिकारी की ओर से किए गए पत्राचार में यह भी बताया गया था कि सेना को इस भूमि के एवज में अन्य जगह भूमि हस्तांतरित की जा सकती है। इसके साथ ही पीडब्ल्यूडी, रेलवे और सैन्य अधिकारियों के बीच इसे लेकर कई दौर की वार्ता हो चुकी है। बावजूद इसके भूमि अधिग्रहण का मामला नहीं सुलझ सका है। इसके चलते ओवरब्रिज का काम अटका है।
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.88 हेक्टेयर भूमि की जानी है अधिग्रहित
ढंडेरा रेलवे फाटक के एक ओर सेना की जिस भूमि को अधिग्रहित किया जाना है, उसका क्षेत्रफल .88 हेक्टेयर है। जानकारी के अनुसार, सैन्य क्षेत्र की पेचीदगी को देखते हुए यहां अंडरपास बनाने के लिए भी सर्वे किया गया, लेकिन मार्ग पर भारी वाहनों के यातायात के चलते यह संभव नहीं हो सका।
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लोगों में रोष, हाईकोर्ट जाने की तैयारी
कई साल से आरओबी का मामला अटकने से लोगों में रोष बढ़ रहा है। लोग हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं। साधन सहकारी समिति के चेयरमैन रवि राणा ने बताया कि रेलवे फाटक पर तीन लोगों की जान जा चुकी है। साथ ही भारी जाम से मुसीबत हो रही है। जल्द जमीन अधिग्रहण का मामला नहीं सुलझा तो हाईकोर्ट में जनहित याचिका डाली जाएगी।
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दोबारा बनानी होगी महंगी डीपीआर
करीब तीन साल पहले केंद्र सरकार ने पुल निर्माण के लिए इस्टीमेट भी जारी किया था, लेकिन तीन साल बाद निर्माण सामग्री के रेट बढ़ने से अब यह योजना और महंगी हो जाएगी। ऐसे में अधिग्रहण होता भी है तो फिर से इस्टीमेट आदि बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। ऐसे में फिलहाल यह योजना खटाई में पड़ती नजर आ रही है।
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केंद्र सरकार ने आरओबी को स्वीकृति दी है। रेलवे का जिम्मा रेलवे लाइन के ऊपर पुल बनाने का है। इसकी अप्रोच रोड के लिए जमीन दिलाने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की है। जमीन उपलब्ध होने के बाद ही इस्टीमेट और टेंडर आदि की प्रक्रिया शुरू होगी।
-नीरज गुप्ता, सीनियर सेक्शन इंजीनियर, रेलवे
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सेना के अधिकारियों से लगातार पत्राचार किया जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। अधिग्रहण की अनुमति हासिल होने के बाद ही आगे का काम शुरू किया जा सकता है।
-मिनहाजुल हसन, एई, एनएच (पीडब्ल्यूडी)