नगर निगम की ओर से गणेशपुर में लोगों की जमीन को सीवरेज पंपिंग स्टेशन (एसपीएस) और ओवरहेड टैंक के निर्माण के लिए एडीबी व जल संस्थान को जमीन दिए जाने के मामले में शहरी विकास सचिव ने नगर निगम व तहसील प्रशासन को संयुक्त जांच के निर्देश दिए हैं। दोनों ने जांच शुरू कर दी है। इससे पहले इस मामले में तहसील प्रशासन ने भी नगर निगम को जांच रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें संबंधित मामले को तहसील कोर्ट और हाईकोर्ट में लंबित होने की बात कहते हुए जमीन को गणेशपुर के लोगों और कुछ हिस्से को तालाब की जमीन बताया है।
कुछ दिनों से गणेशपुर में तालाब की जमीन के प्रकरण को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। कुछ दिन पहले मेयर गौरव गोयल ने पूर्व पार्षदों की ओर से की गई शिकायत का हवाला देते हुए इस जमीन का निरीक्षण किया था। इस दौरान मेयर ने कहा था कि तालाब की जमीन के काफी हिस्से पर अतिक्रमण किया गया है। अगले ही दिन इसके विरोध में वर्तमान पार्षद प्रतिनिधियों ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था कि संबंधित जमीन के मालिकाना हक नगर निगम के पास नहीं है। यह जमीन गणेशपुर में रह रहे लोगों के पूर्वजों की हैं। यही नहीं यह भी आरोप लगाया गया था नगर निगम ने गलत तरीके से यह जमीन एडीबी को सीवरेज पंपिंग स्टेशन और जल संस्थान को ओवरहैड टैंक बनाने के लिए आवंटित कर दी है। बृहस्पतिवार को जलसंस्थान के अधिकारियों ने यह मामला वीडियो कांफ्रेंसिंग में शहरी विकास सचिव शैलेष बगोली के समक्ष भी उठाया था। उन्होंने तहसील और निगम प्रशासन की संयुक्त जांच टीम गठित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद नगर निगम ने अपनी ओर से सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार प्रीतम सिंह को नामित करते हुए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को तहसील की ओर से जांच अधिकारी नियुक्त करने को पत्र भेजा है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अंशुल सिंह ने बताया कि नगर निगम की ओर से इस संबंध में पत्र भेजा गया है। जल्द ही जांच कमेटी का गठन कर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
आवंटन प्रस्तावों की होगी जांच
गणेशपुर की जमीन में एसपीएस और ओवरहेड टैंक के निर्माण के लिए नगर निगम के पिछले बोर्ड में प्रस्ताव लाकर इसे पास कराया गया था। यदि जमीन नगर निगम की नहीं है तो इस प्रस्ताव को हरी झंडी कैसे मिल गई। साथ यह प्रस्ताव किन कागजों के आधार पर किन लोगों की ओर से लाया गया था। जांच में इन सभी बिंदुओं पर भी जानकारी सामने आएगी। ऐसे में जांच शुरू होने से इस मामले में कई नए राज भी खुलने की संभावना है।