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बारिश का असर, गेहूं पर मड़राया पीला रतुआ रोग का प्रकोप

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अब तक किसानों की गेहूं की फसल बारिश का दंश झेल रही थी। अब बिगड़े मौसम के चलते फसल पर पीला रतुआ रोग का प्रकोप मंडराने लगा है। बारिश के बाद निकली तेज धूप से ये रोग पैदा होता है। हवा के कारण ये रोग एक पौधे से दूसरे पौधे के साथ ही दूसरे खेतों में फैलना शुरू हो जाता है। समय पर इस रोग का निदान न होने पर ज्यादा नुकसान हो सकता है।
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हाल ही में दो दिन हुई बारिश के बाद किसानों के खेतों में पानी भर गया था। वहीं अब तीन दिन से तेज धूप निकल रही है। ये धूप जहां अन्य फसलों के लिए लाभदायक हो सकती है। वहीं गेहूं के लिए नुकसानदायक है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में बदलाव के चलते निकल रही चटक धूप से गेहूं के खेेेतों में फफूंद पैदा होने लगती है। फफूंद से पीला रतुआ यानी येलो रस्ट रोग पैदा होने लगता है। इस रोग की चपेट में आने से गेहूं की पत्ती पीली होने लगती है। शुरू में ये रोग खेत में कुछ ही गेहूं के पौधों में दिखाई देता है लेकिन ये रोग हवा के साथ फैलता है। इसलिए कुछ ही समय में ये रोग पूरे खेत को अपनी चपेट में ले लेता है। इस रोग के लगने से गेहूं का उत्पादन बड़ी मात्रा में गिरता है। क्षेत्र में कुछ किसानों की शिकायत है कि उनके खेतों में ये रोग दिखने लगा है। इसको लेकर किसान चिंतित नजर आ रहे हैं।
कृषि विभाग के रुड़की ब्लॉक प्रभारी हर्षवर्द्धन ने बताया कि कुछ किसानों की गेहूं की पत्ती पीली होने की शिकायत आई थी। उन्होंने बताया कि यदि पीली पत्ती पर उंगली रगड़ने से पीली हो जाती है तो समझो कि फसल पीला रतुआ रोग की चपेट में आ गई है। ऐसे में किसान प्रोटीकोनाजोल का 500 एमएल प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। वहीं यदि पीलापन साधारण है तो किसान माइक्रोन्यूट्रेंट तरल को दो लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव कर सकते हैं।
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