विधानसभा चुनाव में पुलिस-प्रशासन की ओर से संदिग्धों पर नजर रखने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन यह दावे धरातल पर नजर नहीं आ रहे हैं। चुनावी शोर में किरायेदारों के सत्यापन का जोर कहीं गुम सा हो गया है। ऐसे में मकानों, पीजी और हॉस्टलों में बाहरी के साथ संदिग्ध लोग बिना सत्यापन के रह रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि ये लोग चुनाव में माहौल भी खराब कर सकते हैं। बावजूद इसके पुलिस की ओर से इस तरफ गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
चुनावी बिगुल बजते ही पुलिस और प्रशासन ने बॉर्डर पर सतर्कता बढ़ा दी है। सीमाओं पर हर आने-जाने वाले व्यक्ति की गहन चेकिंग की जा रही है। साथ ही वाहनों की भी तलाशी ली जा रही है। वहीं, शहर के अंदर पुलिस ने सतर्कता कम कर दी है। चुनाव की तारीख घोषित नहीं होने से पहले पुलिस ने शहर से लेकर देहात में किराये पर रहने वाले लोगों के लिए सत्यापन अभियान चलाया था। ऐसे में किराये पर रहने वाले अपराधी प्रवृत्ति के लोग पुलिस के डर से शहर छोड़कर चले गए थे, लेकिन अब चुनावी शोर में पुलिस का ध्यान इस तरफ दूसरी तरफ हुआ तो ये लोग वापस शहर में आकर बिना सत्यापन के रहने लगे हैं।
आशंका जताई जा रही है कि ये लोग शहर में रहकर चुनावी माहौल खराब कर सकते हैं। साथ ही मादक पदार्थों की बिक्री भी कर रहे हैं। शहर में कई ऐसे पीजी, हॉस्टल हैं, जिनमें बाहरी लोग रह रहे हैं, लेकिन ज्यादातर का सत्यापन नहीं हुआ है। ऐसे में ये लोग चुनाव पर असर डाल सकते हैं। बावजूद इसके पुलिस अधिकारी इस तरफ गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहे हैं। एसपी देहात प्रमेंद्र डोबाल ने बताया कि संदिग्धों और अपराधियों को चिह्नित करने के लिए पुलिस को अभियान चलाने के निर्देश दिए जाएंगे।