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चालक को चोर समझकर पीट-पीट कर मार डाला

Sat, 15 Oct 2016 11:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
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नगर कोतवाली क्षेत्र के ललतारौपुल पुल के पास स्थित सुदर्शन आश्रम में घुसे निजी परिवहन कंपनी गढ़वाल मोटर्स आनर्स (जीएमओ) के चालक को आश्रम के लोगों ने चोर समझकर पीट पीटकर मार डाला। बस चालक चमोली जिले का रहने वाला था। चालक के भतीजे की तहरीर पर पुलिस ने आश्रम के संत और एक संस्कृत छात्र के खिलाफ मुकदमा दर्जकर दोनों को हिरासत में ले लिया। 
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 शुक्रवार देर रात आश्रम के प्रमुख संत रघुवीर दास ने पुलिस को सूचना दी कि उनके आश्रम में घुस आए एक व्यक्ति की बुरी तरह पिटाई कर दी । सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और अचेतावस्था में मिले अधेड़ व्यक्ति को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस पड़ताल में मृतक की पहचान लखपत सिंह नेगी (52) पुत्र देवसिंह निवासी गांव चरी, जिला चमोली के रुप में हुई। कोतवाली प्रभारी योगेंद्र पाल सिंह भदौरिया ने बताया कि मृतक जीएमओयू की बस चलाता था।

कोतवाल ने बताया लखपत सिंह देर रात आश्रम के बगल वाले होटल से होते हुए आश्रम की छत पर पहुंच गया था। आश्रम वालों ने चोर समझकर उसकी बुरी तरह पिटाई कर दी। जिससे लखपत सिंह की मौत हो गई। होटल के सीसीटीवी कैमरे की रिकार्डिंग में मृतक अंदर जाते हुए दिखाई दे रहा है। आखिर वह होटल के अंदर क्यों गया, इसका पता नहीं चल पाया। कोतवाल का कहना है कि इससे पहले शुक्रवार देर रात चालक लखपत सिंह अपने परिचालक महकार सिंह के साथ ऋषिकुल के पास एक ढाबे पर खाना खाया था। इसके बाद लखपत वहां से चला गया था। कोतवाल ने बताया कि मृतक के भतीजे अनिल नेगी ने संत रघुवीर दास, संस्कृत छात्र सुमित बडोनी पुत्र सुभाष चंद्र निवासी गांव भटवाडा पट्टी नैलचामी जिला टिहरी गढ़वाल हाल निवासी सुदर्शन आश्रम के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। 
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संत से मिलने पहुंचे कई
हरिद्वार (ब्यूरो)। आश्रम प्रमुख रघुवीर दास से मिलने कई संत, नेता और पहाड़ी महासभा के सदस्य पहुंचते रहे। देर रात से ही कोतवाली में ही जमावाड़ा लगना शुरू हो गया था। सीएम के पूर्व ओएसडी पुरुषोत्तम शर्मा, पूर्व पार्षद दिनेश जोशी, महेश गौड़, जेपी बडोनी, विपुल डंडरियाल, अजय नेगी समेत अनेक नेता कई घंटों तक कोतवाली में डटे रहे। 

भतीजी की सगाई से लौटा था मृतक
हरिद्वार (ब्यूरो)। मृतक के भतीजे अनिल नेगी ने बताया कि बृहस्पतिवार को चचेरी बहन की देहरादून में सगाई थी और चाचा लखपत सिंह नेगी भी वहां थे। उनकी तबियत ठीक नहीं थी। उन्हें तब कुछ देर के लिए अस्पताल में भर्ती भी कराना पड़ा था। शुक्रवार को जरूरी काम की बात कहकर देहरादून से चले आए। अनिल ने बताया कि लंबे समय तक औलाद न होने पर उन्होंने एक बेटी गोद ली हुई थी।
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