लक्सर। गन्ना मूल्य घोषित नहीं किए जाने को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत प्रदेश सरकार पर जमकर बरसे। उन्होंने आपदा प्रबंधन में फेल सरकार और गन्ना खरीद मूल्य घोषित नहीं किए जाने को लेकर एक घंटे का मौन उपवास रखकर शुगर मिल गेट के पास धरना दिया। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाकर पहले लूटा और फिर लूटे हुए धन को लोगों में बांट दिया। कहा कि इस बार आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड में भाजपा का सूपड़ा साफ हो जाएगा।
शुक्रवार को उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ लक्सर पहुंचे। यहां गन्ना मूल्य घोषित न किए जाने के विरोध में शुगर मिल के मुख्य द्वार पर बैठकर उन्होंने एक घंटे का मौन उपवास किया। इसके बाद हरीश रावत ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों की जान इस तरह खींच ली है, जिस तरह बंदर सांप को रगड़-रगड़कर मारता है। पहले लूटा और अब लूटकर तेल की कीमतों में थोड़ी सी कमी कर सरकार राजनीति कर रही है। कहा कि लोगों की जान पहले ही कोरोना ने खींच ली है। महाराष्ट्र-केरल को छोड़कर उत्तराखंड में कोरोना से सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं। लोग अभी दर्द भूले भी नहीं हैं कि कोरोना की तीसरी लहर ने फिर दस्तक दे दी है। देवस्थानम बोर्ड को लेकर हरीश रावत ने कहा कि अगर हमारी सरकार आती है तो हम देवस्थानम बोर्ड को निश्चित रूप से भंग करेंगे। किसानों को गन्ने का उतना समर्थन मूल्य देंगे, जिससे हमारे किसान की टूटती कमर में जान आ जाए। साथ ही इकबालपुर शुगर मिल पर पिछले वर्षों का बकाया गन्ना भुगतान भी दिलवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सरकार किसान हितैषी नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हर घर में पढ़ा लिखा युवा बेरोजगार घूम रहा है। उन्होंने कहा कि 2022 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 65 सीटों पर परचम लहराएगी। इस अवसर पर रीना गुप्ता, कमला कश्यप, बबली देवी, आरिफ राणा, डॉ. उमा दत्त शर्मा, पूर्व विधायक हाजी तस्लीम, धर्मराज चौहान, ताहिर हसन, पूर्व चेयरमैन जगदेव सिंह जग्गी, संजय वर्मा, रोशन लाल, नत्थू सिंह, सत्यवीर सिंह, मास्टर कुशल पाल सैनी, अमरजीत, अदनान खान, आस मोहम्मद, बलदेव सिंह, जिला अध्यक्ष किसान कांग्रेस सेठ पाल परमार, नगर अध्यक्ष देव राणा, वसीम, तुषार खटीक और कृष्णपाल सिंह मुखिया आदि मौजूद थे।
धरने के विरोध में बोले जिला प्रवक्ता
लक्सर। कांग्रेस के जिला प्रवक्ता सहदीप सिंह ने लक्सर में हरीश रावत के धरने पर निशाना साधा। उन्होंने बयान जारी कर कहा कि गन्ना मूल्य की घोषणा मिल नहीं सरकार करती है। ऐसे में हरीश रावत को मिल गेट के बजाय विधानसभा या सचिवालय के गेट पर धरना देना चाहिए था। संवाद