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कल पहली बार स्कूल में पढ़ाई करेंगे नन्हें बच्चे

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शहर के अधिकतर स्कूलों में दो साल बाद पहली बार एलकेजी और यूकेजी के बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई छोड़कर ऑफलाइन पढ़ाई के लिए स्कूल की तरफ रुख करेंगे। अभी तक केवल फोन पर अपनी मैडम को देखने वाले बच्चे पहली बार उनसे रूबरू होंगे। स्कूल जाने को लेकर बच्चों में काफी उत्साह दिखाई दिखाई दे रहा है।
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अगस्त में शिक्षा सचिव ने कक्षा नौ से 12 तक के स्कूल खोलने के निर्देश दिए थे। इसके बाद धीरे-धीरे एक से 12वीं तक सभी बच्चे स्कूल जाने लगे थे। अभी तक निजी स्कूलों में एलकेजी और यूकेजी के बच्चों के लिए कक्षाएं संचालित नहीं की गई थीं। अब शहर के निजी स्कूलों ने एकमत होकर एलकेजी और यूकेजी के स्कूल खोलने का मन बना लिया है। हालांकि कुछ स्कूलों में नन्हे बच्चों को पहले ही बुलाना शुरू कर दिया था, जबकि अधिकतर स्कूलों में कल यानी 29 नवंबर से स्कूल खुल रहे हैं। ये वे बच्चे हैं, जिनका एडमिशन कोरोनाकाल के बीच में हुआ था। पिछले साल भी जब तक छोटे बच्चों के स्कूल खुलते तो कोरोना ने फिर से दस्तक दे दी थी। ऐसे में इन बच्चों ने आज तक स्कूल जाकर ही नहीं देखा। ये बच्चे पहली बार अपना स्कूल देखेंगे। इसको लेकर बच्चे काफी उत्साहित हैं। कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए स्कूल खोले जा रहे हैं। इसके तहत हर बच्चे को मास्क पहनकर आना जरूरी है। स्कूल में बच्चों को एक साथ खेलने पर रोक होगी। बच्चे पेन और पेंसिल भी आपस में शेयर नहीं कर पाएंगे। सीबीएसई रुड़की जोन की कोऑर्डिनेटर माला चौहान ने बताया कि सभी प्रधानाचार्यों ने एक राय होकर स्कूल खोलने का निर्णय लिया है।
बाजार में ड्रेस खरीदने उमड़ी भीड़
एक-दो दिन पहले ही स्कूल प्रबंधकों ने स्कूल खोलने को लेकर अभिभावकों के साथ बैठक की थी। इसके बाद अभिभावकों से स्वीकृति प्रमाणपत्र भी भरवाया गया। वहीं अभिभावकों को बच्चों की ड्रेस और पाठ्यक्रम की जानकारी दी गई। शनिवार को शहर की ड्रेस के लिए चयनित दुकानों पर अभिभावकों की भीड़ लगी रही। अभिभावक पूजा शर्मा और सोनिया सैनी ने बताया कि कई घंटे से दुकानों पर बच्चों की ड्रेस ढूंढ रहे हैं। अधिकतर दुकानदार ड्रेस खत्म होने की बात कह रहे हैं। ऐसे में उनके सामने बच्चों को बिना ड्रेस के स्कूल भेजने की समस्या खड़ी हो गई है। वहीं दुकानदारों का कहना है कि स्कूल प्रबंधकों ने उन्हें समय से सूचना नहीं दी कि स्कूल खुलने वाले हैं। अभी अभिभावकों को जो ड्रेस दी गई है, वह कोरोनाकाल से पहले बनवाई हुई थी। अब नए सिरे से छोटे बच्चों की ड्रेस सिलवाने के लिए ऑर्डर दिया गया है। एक-दो दिन में ड्रेस मिलनी शुरू हो जाएगी।
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