इकबालपुर क्षेत्र में दो शुगर मिलों के तौल केंद्र लगे हुए है लेकिन ढुलाई किराया लगने से किसान गन्ने की आपूर्ति बहुत कम कर पा रहे हैं। ढुलाई का चार्ज किसानों से लेना बंद कर दिया जाए तो किसान तौल केंद्रों पर गन्ने की आपूर्ति बढ़ाने के लिए तैयार है।
इकबालपुर शुगर मिल का पेराई सत्र अब तक चालू न होने से गन्ना आयुक्त ने इस क्षेत्र के किसानों की सुविधा के लिए लक्सर व लिब्बरहेड़ी शुगर मिलों के तौल केंद्र स्थापित करा दिए थे। इन तौल खरीद केंद्रों से गन्ने की ढुलाई मिलों तक करने का किराया किसानों से काटा जा रहा है।
इससे पहले पिछले पेराई सत्रों में इकबालपुर शुगर मिल गेट पर गन्ना आपूर्ति करते हुए किसानों से किराया नहीं लिया जाता था। किसान इस किराए के लिए गन्ना तौल केंद्रों पर गन्ना आपूर्ति करने से कतरा रहे है। किसान राजपाल सिंह, बिजेंद्र कुमार व अनिल आदि ने बताया कि किसानों से ढुलाई किराया न लिया जाए तो किसान तौल केंद्रों पर गन्ना आपूर्ति करने में रुझान ले सकते हैं।
कहने को तो किसानों को 405 रुपये प्रति क्विंटल का भाव दिया जा रहा है लेकिन किराया काटकर किसानों को 400 सौ रुपये से भी कम भाव प्राप्त हो रहा है। उधर इस वर्ष बारिश ज्यादा देरी तक होने से गन्ने की पैदावार बहुत कम हो गई है। दूसरे गन्ना कोल्हू में 400 के पार गन्ने का भाव नकद में प्राप्त हो रहा है।
वहीं इकबालपुर गन्ना विकास परिषद के ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक अमित कुमार ने बताया कि गन्ने की पेडी फसल का उत्पादन इस सत्र में कम मिल रहा है। आगामी पेराई सत्र में गन्ने का उत्पादन बढ़वाने के लिए नई प्रजाति के गन्ना बीज उपलब्ध कराएं जाएंगे।
वहीं गांव-गांव जाकर किसानों को वैज्ञानिक विधि से गन्ने की खेती करने के लिए गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी। फिलहाल गन्ना मिलों को पर्याप्त मात्रा में गन्ने की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। किसानों को गन्ना मिलों में ही गन्ने की आपूर्ति करने से उचित व एक समान दाम मिलता है।