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वेंटिलेटर पर हैं सरकारी अस्पताल का आईसीयू 18-06-04

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एक ओर जहां प्रदेश में कोरोना के मरीज बिना वेंटिलेटर के दम तोड़ रहे हैं, वहीं रुड़की सिविल अस्पताल में रखे 14 वेंटिलेटर धूल फांक रहे हैं। कोरोना महामारी के बीच जब आईसीयू और वेंटिलेटर के लिए कोरोना संक्रमित मरीज तड़प रहे हैं, वहां करोड़ों खर्च करने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग मरीजों को इनका लाभ नहीं दे पा रहा है।
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करीब सवा साल पहले कोरोना संक्रमण को देखते हुए सिविल अस्पताल रुड़की में स्वास्थ्य विभाग की ओर से आईसीयू वार्ड बनवाना शुरू किया गया था। उस दौरान आईसीयू के लिए 14 वेंटिलेटर मशीनें और अन्य जरूरी उपकरण भी मंगवाए गए थे। सिविल अस्पताल के थर्ड फ्लोर पर आईसीयू वार्ड बनाने का काम शुरू किया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस आईसीयू वार्ड का ऑनलाइन उद्घाटन भी किया था। बाद में इस आईसीयू को अपडेट करने के लिए फिर से इसमें काम शुरू कराया गया, लेकिन करीब एक साल से अधिक समय होने के बाद भी आईसीयू वार्ड का काम पूरा नहीं हो पाया है। वार्ड के लिए आई 14 वेंटिलेटर मशीन आज भी धूल ही फांक रही है। स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही पर अब भी किसी का ध्यान न जाता यदि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर शुरू न हुई होती। वर्तमान में स्थिति यह है कि कोरोना संक्रमण की चपेट में आ रहे मरीजों को अस्पतालों में बेड तक नहीं मिल रहे हैं। वेंटिलेटर के अभाव में प्रतिदिन मरीज दम तोड़ रहे हैं, लेकिन आईसीयू को शुरू करने पर विभाग की ओर से अभी भी गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हालांकि आईसीयू को शुरू करने को लेकर दावे बड़े-बड़े जरूर किए जा रहे हैं।
मात्र एक निजी अस्पताल में है वेंटिलेटर
रुड़की शहर स्वास्थ्य सुविधाओं से कितना पिछड़ा हुआ है ये इस बात से अंदाजा लग सकता है कि यहां मात्र एक प्राइवेट अस्पताल में वेंटिलेटर सुविधा मौजूद है। दरअसल, अभी कोरोना महामारी के बीच गंभीर संक्रमित मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही है। सरकारी अस्पताल में वेंटिलेटर होने के बावजूद उन्हें चालू नहीं किया गया है। ऐसे में मरीजों को प्राइवेट में ही रेफर कर दिया जाता है। वहीं रुड़की शहर में एकमात्र विनय विशाल हॉस्पिटल के आईसीयू वार्ड में वेंटिलेटर की सुविधा है। यहां भी वेंटिलेटरों की संख्या पांच ही है।
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...तो किस काम का कोविड वार्ड
कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती करने के लिए सिविल अस्पताल में 36 बेड का वार्ड बनाया गया था। ये अलग बात है कि ये अभी तक खाली पड़ा है। जबकि शहर में स्थिति ये है कि मरीजों को भर्ती होने के लिए बेड नहीं मिल पा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी इस वार्ड में मरीजों को भर्ती करने को लेकर निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। जबकि वार्ड को बने हुए 15 दिन से अधिक समय हो चुका है। हालांकि 3 दिन पहले एक कोरोना संक्रमित महिला को डिलीवरी के बाद यहां भर्ती किया गया था। हैरत की बात यह है कि आईसोलेट का टाइम पूरा किए बिना ही महिला को दो दिन बाद ही डिस्चार्ज कर दिया गया था।
आईसीयू वार्ड बनाने का का काम चरम पर चल रहा है। जल्द से जल्द काम पूरा कर दिया जाएगा। इसके बाद वेंटिलेटर शुरू कर गंभीर मरीजों को भर्ती किया जाएगा। कोविड वार्ड के लिए अभी स्टाफ की कुछ कमी है। बावजूद इसके मरीज भर्ती किए जा रहे हैं।
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- डॉ. संजय कंसल, सीएमएस, सिविल अस्पताल रुड़की
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