इमलीखेड़ा में बिजली बाधित होने के कारण फैक्टरी में शुक्रवार को भी ऑक्सीजन बनाने का काम कई घंटे बाधित रहा। फैक्टरी स्वामी ने बताया कि बिजली की आपूर्ति नहीं होने के कारण सुबह से शाम तक मात्र सौ सिलिंडर ऑक्सीजन ही तैयार हो पाए हैं। जबकि पूरी बिजली मिलती तो करीब 900 सिलिंडर ऑक्सीजन के तैयार हो जाते। हालांकि शाम चार बजे तक मौके पर पहुंचे ऊर्जा निगम के अधिकारियों ने फाल्ट को ठीक कराने के बाद आपूर्ति सुचारु करा दी है।
इमलीखेड़ा स्थित ऑक्सीजन प्लांट में दो दिन से बिजली आपूर्ति में परेशानी के चलते ऑक्सीजन बनाने का काम प्रभावित हो रहा है। फैक्टरी स्वामी मयंक चोपड़ा ने बताया कि बृहस्पतिवार की रात भी बिजली की ट्रिपिंग हुई। इसके बाद शुक्रवार को सुबह सात बजे बिजली गुल हो गई। बीच-बीच में बिजली आई, लेकिन फिर गुल हो गई। शाम करीब साढ़े चार बजे बिजली आपूर्ति बहाल हो सकी। इसके चलते दिनभर में मात्र सौ ऑक्सीजन के सिलिंडर ही तैयार हो पाए हैं। यदि पूरी बिजली मिलती तो 900 सिलिंडर तैयार हो जाते। उन्होंने बताया कि उनकी फैक्टरी से रुड़की, हरिद्वार, भगवानपुर समेत ऋषिकेश और अन्य स्थानों के अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई की जा रही है। उधर, अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति से मामला जुड़ा होने के कारण ऊर्जा निगम भी शुक्रवार को हरकत में आया। फैक्टरी की लाइन में फाल्ट ठीक कराने के लिए हरिद्वार से चीफ इंजीनियर संजय टम्टा इमलीखेड़ा फीडर पर पहुंचे। यहां उन्होंने स्थानीय अधिकारियों को भी मौके पर बुलाया। इसके बाद उन्होंने फीडर से फैक्टरी तक पहुंच रही लाइन के बीच में आ रहे पेड़ों की लॉपिंग कराई। इस काम में लंबा समय भी लगा। इसके साथ ही फीडर का लोड कम करने के लिए कई गांव की सप्लाई यहां से हटाकर दूसरे फीडरों से जोड़ा गया है। अब इस फीडर पर पांच फैक्टरी, बूढपुर गांव, दो ढाबे और एक पेट्रोल पंप को ही सप्लाई दी जा रही है। ऊर्जा निगम के शहरी अधिशासी अभियंता वीके सिंह ने बताया कि लाइन पर पेड़ों की टहनियों के कारण फाल्ट हो रहा था, जिसे दुरुस्त करा दिया गया है। साथ ही फीडर की लाइन का लोड भी घटा दिया गया है। इससे अब आपूर्ति बाधित नहीं होगी।
लोग मर रहे हैं, अस्पताल संचालक दे रहे हैं धमकी
फैक्टरी स्वामी ने बताया कि इस समय ऑक्सीजन तैयार करने को लेकर भारी दबाव है। अस्पतालों की जरूरत को देखते हुए 24 घंटे काम करने को तैयार है। उन्होंने बताया कि बिजली बाधित होने से ऑक्सीजन नहीं बन पाई। जिसकी वजह से अस्पताल संचालक फोन कर धमकी दे रहे हैं कि ऑर्डर नहीं मिलने से लोग मर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अस्पतालों को जरूरत के हिसाब से ऑक्सीजन देने की पूरी कोशिश की जा रही है। प्लांट चलता रहता है तो ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं हो पाएगी।
जरूरत से मुताबिक है ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता
चार फैक्टरियों में करीब एक हजार क्यूबिक मीटर प्रति घंटा उत्पादन
संवाद न्यूज एजेंसी
रुड़की। अस्पतालों की जरूरत के हिसाब से जिले की चार फैक्टरियों में तैयार की जा रही ऑक्सीजन पर्याप्त है। यही नहीं यहां तैयार ऑक्सीजन को बाहर भी भेजा जा रहा है। जिला उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक पल्लवी गुप्ता ने बताया कि पहले राज्य की जरूरत पूरी की जाएगी। उसके बाद जो ऑक्सीजन बचेगी उसे अन्य राज्यों को सप्लाई किया जा सकता है। फिलहाल ऑक्सीजन की कोई किल्लत नहीं है।
जिला उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक पल्लवी गुप्ता ने बताया कि जिले के झबरेड़ा क्षेत्र में ऐयर लिक्विड में 105 मिट्रिक टन प्रति दिन के हिसाब से ऑक्सीजन तैैयार करने की क्षमता है। यानी प्रति घंटा करीब 200 क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन तैयार हो रही है। इसके अलावा बीएचईएल और इमलीखेड़ा स्थित मां गंगा गैसेज में 250-250 क्यूबिक मीटर प्रति घंटा और मंगलौर स्थित कुमार इस्पताल में 200 क्यूबिक मीटर प्रति घंटा ऑक्सीजन तैयार करने की क्षमता है। उन्होंने बताया कि सभी फैक्टरियां अपनी क्षमता के अनुसार ऑक्सीजन तैयार कर रही है, जिसे अस्पतालों में सप्लाई किया जा रहा है। राज्य की जरूरत पूरा होने के बाद ऑक्सीजन को अन्य राज्य में भेजे जाने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल उत्पादन पर्याप्त है, लेकिन यदि मांग बढ़ती है तो उत्पादन को और भी बढ़ाया जा सकता है।
उद्योगों में खपत को कम करने की अपील
अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए औद्योगिक फैक्टरियों ने अपने यहां ऑक्सीजन की खपत को कम करना शुरू कर दिया है। भगवानपुर इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन के महासचिव गौतम कपूर ने बताया कि उद्यमियों से अपील की गई है कि वे कोरोना संकट को देखते हुए कम से कम ऑक्सीजन की खपत करें।