रुड़की स्थित ब्रह्मपुर में प्राथमिक विद्यालय में खुला नवनिर्मित आंगनबाड़ी केंद्र देखरेख के आभ?
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शहर और आसपास के इलाकों को बाल विकास विभाग ने तीन भागों में बांटा है। इसमें रुड़की प्रथम, ग्रामीण प्रथम और ग्रामीण द्वितीय तीन हिस्से हैं। तीनों हिस्सों में कुल 803 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें से रुड़की प्रथम में 145, ग्रामीण प्रथम में 417 और ग्रामीण द्वितीय में 241 केंद्र हैं। इन केंद्रों पर तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नई शिक्षा नीति के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक, शहरी क्षेत्र में अधिकतर केंद्र किराये के भवन में चल रहे हैं। कुछ केंद्रों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने अपने आवास में खोला है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर सेंटर प्राथमिक विद्यालयों में या पंचायत घरों में चल रहे हैं। अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्र समय से नहीं खोले जा रहे हैं। जहां एक ओर सरकार नई शिक्षा नीति में आंगनबाड़ी केंद्रों को शामिल करने जा रही है तो वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नई शिक्षा नीति के बारे में अधिक जानकारी तक नहीं है। पूछताछ में कुछ कार्यकर्ताओं ने कहा कि उन्हें नई शिक्षा नीति के तहत ट्रेनिंग दी जा चुकी है। पंचायत घरों में खुले आंगनबाड़ी केंद्र भी बदहाल हैं। कई केंद्र ऐसे भवन में खोले गए हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं। अधिकतर केंद्रों पर शौचालय की व्यवस्था नहीं है। बच्चों को बाहर खुले में जाना पड़ता है। ब्रह्मपुर में पंचायत भवन में दो आंगनबाड़ी भवन बनाए गए हैं, लेकिन कई महीनों से इन्हें खोला तक नहीं गया है। ऐसे में यहां चारों ओर साफ-सफाई नहीं होने से बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। ऐसे ही हालत रही तो दोनों भवन गिर सकते हैं।
मंगलौर में अधिकतर भवन जर्जर
मंगलौर। क्षेत्र में संचालित सभी 81 आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं। सरकार की ओर से एक आंगनबाड़ी केंद्र का किराया केवल 700 रुपये मिलता है। ऐसे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इसी किराये के अनुसार एक कमरा लेती हैं। यहां न तो पानी की व्यवस्था होती है और न ही शौचालय की। कई केंद्र जर्जर हालत में हैं। कुछ केंद्रों के सामने कूड़े के ढेर लगे हैं तो कुछ के सामने जलभराव होता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें समय पर किराया तक नहीं मिलता। ऐसे में मकान मालिक कमरे की मरम्मत नहीं करवाता है। सुपरवाइजर प्रभा के अनुसार, उनके सभी केंद्र किराये पर चल रहे हैं। उनका दावा है कि हर सेंटर पर शौचालय और पानी की व्यवस्था है। संवाद
कुछ भवन जर्जर तो कुछ अधूरे पड़े
भगवानपुर। भगवानपुर क्षेत्र में संचालित 439 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 80 का अपना भवन है। अधिकतर केंद्र किराये के भवन में चल रहे हैं। कुछ केंद्र जर्जर हालत में हैं। डाडा जलालपुर में कुछ समय पहले दो भवनों का काम शुरू हुआ था। बीच में बजट रुका तो काम भी बंद हो गया। वर्तमान में ये निर्माणाधीन भवन खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। अधिकारी भी कभी केंद्रों की सुध लेने के लिए कार्यालय से बाहर नहीं निकलते। किराये के भवनों में चल रहे अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत इतनी खराब है कि वहां बैठकर पढ़ना तो दूर, कुछ मिनट के लिए खड़ा होना भी दुश्वार है। मामले में बाल विकास अधिकारी ज्ञानेंद्र पाल का कहना है कि बजट अभी पूरा नहीं आया है। बजट आने पर अधूरे भवनों का काम पूरा करवाया जाएगा। बीडीओ कुसुम डोबरियाल का कहना है कि विभाग की ओर से अभी 99 आंगनबाड़ी भवन बनने हैं, जिनमें कुछ अधूरे हैं। बजट मिलने पर इन्हें पूरा करवा दिया जाएगा। संवाद