इसे खुशकिस्मती कहें या फिर यूक्रेन में फंसे कलियर निवासी शम्मी सिद्दीकी की समय रहते दोगुनी कीमत में एयर टिकट खरीदने का निर्णय, जिसकी
बदौलत आज वे सकुशल अपने घर हैं। अब वह यूक्रेन में फंसे अपने दोस्तों की सलामती के लिए साबिर पाक से दुआ मांग रहे हैं। दिलोदिमाग में छाया युद्ध का डर अब उन्हें परेशान कर रहा है।
हजारों भारतीय छात्रों की तरह ही पिरान कलियर के महमूदपुर निवासी शम्मी सिद्दीकी भी यूक्रेन की राजधानी कीव में रहकर एमबीबीएस के अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहे थे। तीन दिन पहले ही अपने घर पहुंचे शम्मी ने बताया कि यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने जिस समय युद्ध के संकेत दिए और एडवाजरी जारी की कि अपने वतन पहुंचने की तैयारी करो, उसी समय उन्होंने एयर टिकट बुक करने की कोशिश शुरू कर दी थी, लेकिन बुकिंग बार-बार कैंसिल हो रही थी। पर, वे लगातार प्रयास में लगे रहे। आखिरकार करीब 70 हजार रुपये की दोगुनी कीमत में टिकट बुक होने का अवसर उन्होंने नहीं गंवाया और टिकट बुक कर फ्लाइट से भारत लौट आए।
उन्होंने बताया कि उनके कुछ दोस्त ऑफलाइन क्लास को लेकर असमंजस में थे, लेकिन अब वहां कर्फ्यू जैसे हालात हो गए हैं और फ्लाइट भी बंद हो गई हैं। ऐसे में अब उन्हें अपने दोस्तों की फिक्र सता रही है। उनके लिए वे साबिर पाक से दुआ कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि वे चाहते हैं कि जो छात्र यूक्रेन में फंसे हैं, उनके लिए भारत सरकार प्रयास करे और सीज फायर के जरिये विमान से उन्हें वापस लाया जाए। उधर, रुड़की के ढंढेरा निवासी विवेक राठौर भी यूक्रेन में फंसे में हैं। बताया गया है कि करीब नौ माह पहले ही विवेक यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए पहुंचे थे। विवेक के परिजन
उसकी वापसी के लिए परेशान हैं।
साइबर हमले के बाद से मिलने लगे थे युद्ध के संकेत
शम्मी ने बताया कि यूक्रेन में जब साइबर अटैक हुआ था तो बैंक ट्रांजेक्शन आदि नहीं हो पा रही थी। उसी समय संकेत मिलने लगे थे कि हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं। तभी से यूक्रेन से निकलने के लिए रास्ते तलाशने शुरू किए जाने लगे थे।
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे विवाद के बीच हरिद्वार के प्रथम उन सौभाग्यशाली मेडिकल के छात्रों में शामिल हैं, जो पहले ही अपनों के बीच पहुंच गए। 18 फरवरी को घर पहुंच चुके प्रथम झांब ने अमर उजाला के साथ वहां के हालात साझा किए।
ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र की नया हरिद्वार कालोनी निवासी दवा कारोबारी अनिल झांब के बड़े बेटे प्रथम झांब ने 11 दिसंबर 2021 को यूक्रेन की राजधानी कीव स्थित बोगो मोलेट मेडिकल यूनीवर्सिटी में प्रवेश लिया था। प्रथम झांब तब से वहां पढ़ाई कर रहे थे। रूस और यूक्रेन के बीच उपजे संकट ने उन्हें घर लौटने पर विवश कर दिया।
उन्होंने बताया कि वहां के हालात बिल्कुल भी ठीक नहीं थे। यह पता नहीं रहता था कि कब क्या हो जाए। वहां सभी लोग डरे हुए थे। 15 दिन से वह भी आवास से बाहर नहीं निकल पा रहे थे। पास में ही स्थित स्टोर से 10 मिनट के भीतर खाने का सामान ले आते थे। शहरों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया था। प्रथम के पिता अनिल झांब ने बताया कि युद्ध को लेकर उनके मन में अजीबोगरीब ख्याल आ रहे थे। बेटे के वापस आने से राहत मिली है। संवाद
खाद्य सामग्री कीमतें बढ़ गई थी
उन्होंने बताया कि यूक्रेन में खाद्य सामग्री व अन्य जरूरी सामान की कीमतें भी बढ़ गई थी। फ्लाइट के टिकट भी महंगे हो गए थे। यूक्रेन से भारत का टिकट सामान्य रूप से भारतीय मुद्रा में 30 हजार रुपये था, लेकिन उन्हें 60 हजार रुपये में टिकट मिला है। वह भी डायरेक्टर फ्लाइट नहीं थी।
शम्मी भी लौटे अपनों के बीच
पिरान कलियर निवासी शम्मी खान पिछले पांच सालों से यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। रूस-यूक्रेन के हालातों के बाद शम्मी भी
अपनों के बीच कलियर पहुंच चुके हैं। हरिद्वार के ज्वालापुर निवासी शम्मी खान के जीजा शिरान ने बताया कि शम्मी का इस वर्ष पढ़ाई का आखिरी साल है।