भगवानपुर क्षेत्र के करीब आधा दर्जन गांवों में इन दिनों गुलदार की चहलकदमी से लोग दहशत में हैं। बीती रात गांव पहुंचा गुलदार एक ग्रामीण के मकान की छत पर काफी देर तक बैठा रहा। गुलदार को देखने के लिए आसपास ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। सूचना पर पहुंचे वनकर्मियों ने फायरिंग कर गुलदार को खदेड़ा। कुछ देर बाद गुलदार तो जंगल की ओर भाग गया, लेकिन दहशत में ग्रामीण पूरी रात जागकर पहरा देते रहे। उन्होंने गुलदार नहीं पकड़ने को लेकर वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
भगवानप़ुर क्षेत्र में अक्सर जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है, लेकिन पिछले करीब एक महीने से एक गुलदार अपने दो शावकों के साथ गींशहीदपुर और आसपास के गांवों के खेतों में लगातार दिखाई दे रहा है। पिछले दिनों ग्रामीणों की शिकायत पर वन विभाग की ओर से यहां एक पिंजरा भी लगाया गया था, लेकिन अभी तक गुलदार पकड़ में नहीं आ सके है। बृहस्पतिवार रात गींशहीदपुर गांव में उस समय हड़कंप मच गया, जब गुलदार ग्रामीण अनिल सैनी के मकान की छत पर आकर बैठ गया। रात करीब नौ बजे कुछ लोग छतों पर सोेने पहुंचे तो उनकी नजर गुलदार पर पड़ी। इस पर उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया। थोड़ी देर में ही बड़ी संख्या में ग्रामीण आसपास एकत्र हो गए।
वनकर्मियों को भी फोन कर सूचना दी गई। ग्रामीण अपने-अपने तरीके से भी गुलदार को भगाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन गुलदार छत पर ही जमा रहा। काफी देर बाद वनकर्मी गांव में पहुंचे और बंदूक से फायरिंग की। फायरिंग की आवाज सुनकर गुलदार जंगल की ओर भाग गया। वनकर्मियों ने ग्रामीणों को अपने स्तर पर भी सतर्कता बरतने की अपील की है। वहीं, रुड़की के रंजर मयंक गर्ग ने भी गांव का दौरा किया और ग्रामीणों की समस्याएं जानी। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि वनकर्मी उनकी सुुरक्षा के लिए चौकन्ने हैं। ग्रामीण महकार सिंह, रामपाल सैनी, अनिल कुमार, शहजाद अली, प्रवीण कुमार, राशिद अली, बीर सिंह आदि ने गुलदार से निजात दिलाने की मांग की है।
खेतों में जाने से कतरा रहे ग्रामीण
गुलदार के डर से क्षेत्र के गींशहीदपुर, लव्वा, खुब्बनपुर, चोली शहाबुद्दीनपुर, सिसौना और मक्खनपुर आदि गांवों के लोग दिन में खेतों पर जाने से भी कतराने लगे हैं। उनका कहना है कि पिछले करीब एक महीने से क्षेत्र में एक गुलदार और दो शावकों की लगातार चहलकदमी देखी जा रही है। वन विभाग के अधिकारियों को भी कई बार सूचना दी गई, लेकिन अभी तक गुलदार पकड़े नहीं जा सके हैं।