भारतीय किसान यूनियन टिकैत के राष्ट्रीय युवा नेता गौरव टिकैत के नेतृत्व में किसानों ने ऊर्जा निगम कार्यालय पर धावा बोलकर विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों ने ऊर्जा निगम की ओर से लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर का कड़ा विरोध किया। कहा कि प्रदेश सरकार यदि किसानों को गन्ने सहित अन्य फसलों का भुगतान एडवांस दिला दे तो किसान अपने घरों में स्मार्ट मीटर लगवा लेंगे।
मंगलवार को भाकियू टिकैत के राष्ट्रीय युवा नेता गौरव टिकैत मंगलौर गुड़ मंडी में पहुंचे। वहां से उनके नेतृत्व में किसान जुलूस के रूप में ऊर्जा निगम के एसई कार्यालय में पहुंचे। यहां किसानों ने महापंचायत आयोजित कर किसानों की समस्याओं को उठाया। गौरव टिकैत ने कहा कि प्रदेश सरकार के साथ ही प्रशासन और सरकारी महकमे खासतौर पर ऊर्जा निगम किसान विरोधी है।
ऊर्जा निगम किसानों के घरों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाना चाहता है। इससे किसानों को एडवांस में रिचार्ज करवाकर बिजली इस्तेमाल करनी होगी। उन्होंने मांग उठाई कि सरकार चीनी मिल से किसानाें को गन्ने का एडवांस भुगतान दिलवा दे। सहकारी समितियों से धान और गेहूं ब्रिकी का एडवांस भुगतान करवा दें। इसके बाद किसान बिना किसी विरोध के अपने घरों पर स्मार्ट मीटर लगवा लेंगे।
उन्होंने कहा कि नेताओं से लेकर सरकारी अधिकारियों यहां तक कि कर्मचारियों के वेतन में भी हर साल बढ़ोतरी होती है। किसानों को मिलने वाली सालाना छह हजार की पेंशन को अब 50 हजार रुपये किया जाए। इसके अलावा भी किसानों ने अन्य कई विभागों से संबंधित समस्याओं को अधिकारियों के सामने रखा। इस दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने किसानों की कई समस्याओं का निस्तारण कर दिया। कई समस्याओं के निस्तारण का आश्वासन दिया लेकिन ऊर्जा निगम के एसडी अमित कुमार किसानों की समस्याओं को लेकर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। ऐसे में किसानों ने मौके पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। साथ ही चेतावनी दी कि अब धरना आंदोलन का रूप लेगा। मौके पर भाकियू मंडल अध्यक्ष संजय चौधरी, जिलाध्यक्ष विजय शास्त्री, पदम सिंह भाटी, सागर सिंह, जहिद, नवीन राठी, कालूराम, अरविंद, वेदपाल, सोमवीर सिंह, अशोक कुमार आदि मौजूद रहे।
‘ऊर्जा प्रदेश में किसानों को मुफ्त बिजली मिले’
ऊर्जा निगम कार्यालय पर शुरू हुए भाकियू टिकैत के अनिश्चितकालीन धरने में किसानों का सबसे अधिक ऊर्जा निगम के खिलाफ गुस्सा दिखाई दिया। किसानों ने आरोप लगाया कि ऊर्जा निगम के अधिकारी किसानों से वार्ता करने में भी शर्मिंदगी महसूस करते हैं। जिला अध्यक्ष विजय शास्त्री ने कहा कि कहने के लिए उत्तराखंड ऊर्जा प्रदेश है, लेकिन इस प्रदेश में किसानों को सबसे अधिक बिजली कटौती झेलनी पड़ती है। आज तमाम सुविधाएं होने के बावजूद हल्की बारिश, हवा या आंधी आने पर बिजली गुल कर दी जाती है। उन्होंने प्रदेश में किसानों को ट्यूबवेल के कनेक्शनों पर बिजली मुफ्त दिए जाने की मांग की।