बकाया गन्ना भुगतान समेत कई मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में किसान सड़कों पर उतर गए हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से पहुंचे किसानों के कारण हाईवे से लेकर शहर तक जाम ही जाम लग गया। तहसील जा रहे कसिानों को सिविल लाइंस कोतवाली के बाहर ही रोक लिया गया। जिस पर भाकियू ने कोतवाली में ही धरना शुरू कर दिया। ं इस दौरानजाम से पसीने छूट गए।
सोमवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भारतीय किसान यूनियन बकाया गन्ना भुगतान समेत कई मांगों को लेकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से तहसील में धावा बोलने जा रहे थे। हाईवे से होते हुए जब भाकियू का जुलूस सिविल लाइंस से होते हुए तहसील मुख्यालय जा रहा था तो कोतवाली सिविल लाइंस के बाहर ही उसे रोक लिया गया। जिस पर भाकियू ने कोतवाली में ही धरना शुरू कर दिया। साथ ही ट्रैक्टरों को हाईवे से लेकर नगर निगम मलकपुर चुंगी मार्ग, चंद्रशेखर चौक से लेकर सिविल लाइंस में खड़ा कर जाम लगा दिया। जिससे हाईवे से लेकर शहर तक जाम लग गया। जाम लगने के कारण बाहरी वाहनों के साथ ही शहरवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
धरने को संबोधित करते हुए भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष पदम सिंह रोड़ ने कहा कि किसानों की समस्या के प्रति सरकार और अधिकारी बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। किसान आंदोलनों पर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार किसानों का बकाया गन्ना भुगतान नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस सरकार को इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। भाकियू के जिलाध्यक्ष नाजिम अली ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों का वेतन कई सौ गुना बढ़ गया है, लेकिन किसानों की फसलों के दामों में बेहद कम बढ़ोत्तरी हुई है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट मयूर दीक्षित, सीओ स्वप्न किशोर मौके पर पहुंचे। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने किसानों का ज्ञापन लेकर सभी मांगें को जल्द से जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया। इस पर किसानों ने अपना धरना समाप्त कर दिया। इसके बाद जाम खुलने से यातायात सुचारू हो सका।
धरने पर अनवर सिंह आर्य, फैय्याज, प्रदीप त्यागी, इंद्ररोड़, नरेश त्यागी, संजीव कुशवाह आदि मौजूद रहे।
कोतवाली में छेड़ी किसानों ने रागिनी
बजे ढोल-नगाड़े, हुआ नाच-गाना
भाकियू की ओर से कोतवाली में किए गए धरने के दौरान जमकर ढोल-नगाड़े बजे। किसानों ने अपने मनोरंजन के लिए गायकों से गीत, रागिनियां सुनीं। ढोलियों ने भी खूब ढोल बजाए। ऐसा नजारा कोतवाली में पहली बार देखने को मिला।
टकराव के डर से तहसील जाने से रोका
पुलिस-प्रशासन को डर था कि कहीं भाकियू के दूसरे गुट के तहसील में पहुंच जाने से टकराव न हो जाए। क्योंकि यहां ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कार्यालय के बाहर पहले से ही भाकियू का एक गुट धरना दे रहा है। जिनमें आपस में ही छत्तीस का आंकड़ा है। इसलिए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर दूसरे गुट को तहसील में जाने की बजाए कोतवाली में ही रोक लिया। प्रशासन की यह सारी रणनीति एक दिन पहले की बनी और इस पर रैली के दिन काम कर लिया गया।
हेलमेट जरूरी किया तो होगा आंदोलन
भाकियू ने धरने के दौरान हेलमेट जरूरी करने पर भी कड़ी आपत्ति जताई। भाकियू नेताओं ने कहा कि यह तो ठीक है कि हाईवे पर हेलमेट होना चाहिए, लेकिन लोकल एवं बाजार में हेलमेट की क्या जरूरत है। भाकियू ने चेतावनी दी कि अगर हेलमेट जरूरी किया गया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
ट्रैक्टर रोकने पर नाराज हुए किसान
कोतवाली के सामने ही रोकने पर तो भाकियू ने कोई आपत्ति नहीं जताई, लेकिन जब पुलिस की ओर से ट्रैक्टरों को रोका गया और आगे निकाला गया तो भाकियू नेता भड़क गए। भाकियू नेताओं ने मौके पर पहुंचकर ट्रैक्टर रोकने एवं आगे निकलने पर जमकर नाराजगी जताई।
मिल पर करेंगे कब्जा
भाकियू धरने पर इंरद्ररोड़ ने कहा कि कुछ काश्तकार कहते हैं कि वह अब गन्ना नहीं बोएंगे, लेकिन किसानों को गन्ना बोना नहीं छोडना है। किसान गन्ना भी बोएंगे और जरूरत पड़ी तो मिल पर कब्जा कर उसे स्वयं चलाएंगे। पहले भी किसानों ने क्रशर और कोल्हू चलाए हैं। अब फिर स्वयं शक्कर एवं राब बनाएंगे।
मिलों पर 48 करोड़ बकाया
लक्सर शुगर मिल की ओर से तो समस्त गन्ने का भुगतान कर दिया गया है, लेकिन क्षेत्र की दोनों मिल लिब्बरहेड़ी और इकबालपुर शुगर मिल पर करीब 48 करोड़ रुपये का बकाया चल रहा है। जिसमें गन्ना विभाग की ओर मिली जानकारी के अनुसार उत्तम शुगर मिल पर 22 करोड़ एवं इकबालपुर शुगर मिल पर 26 करोड़ रुपये बकाया चल रहा है।
23 को मिल एवं अधिकारियों से वार्ता
भाकियू की 23 तारीख को मिल के अधिकारियों से भुगतान के मामले पर वार्ता होगी। जिसमें प्रशासन ने मिलों की ओर से भुगतान का आश्वासन दिलाया है। इसके अलावा चकबंदी विभाग के अधिकारी भी वार्ता में रहेंगे। भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष पदम सिंह रोड़ एवं जिलाध्यक्ष नाजिम अली ने बताया कि अगर वार्ता विफल होती है तो किसान फिर से अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर देंगे।