शहर और आसपास होने वाली अधिकतर रामलीलाओं में जहां बाहरी कलाकार अभिनय करते हैं तो वहीं रुड़की गढ़वाल सभा की रामलीला में हर कलाकार सभा का ही सदस्य है। खास बात ये है कि दशकों से आज तक इस रामलीला में किसी बाहरी कलाकार ने अभिनय नहीं किया है। यही कारण है कि गढ़वाल सभा की रामलीला का अलग ही स्थान है। यही नहीं, शहर में एकमात्र ऐसी सभा है, जिसने वर्ष 1993 में हुए रामपुर तिराहा कांड के विरोध में करीब 20 साल तक रामलीला का मंचन बंद कर दिया था।
इस समय रुड़की और आसपास के क्षेत्रों में कई रामलीलाओं का मंचन चल रहा है। शहर की प्रमुख बीटीगंज की रामलीला समेत लगभग सभी समितियां हर साल बाहरी कलाकार बुलाती हैं। वहीं, रामनगर में इस बार पर्दे पर रामलीला दिखाई जा रही है। इन सबके बीच सुभाष नगर स्थित रुड़की गढ़वाल सभा की रामलीला में स्थानीय कलाकार ही अभिनय करते हैं। इनमें भी अधिकतर कलाकार समिति के पदाधिकारी और सदस्य ही हैं। सभा के संयोजक मोहनलाल बहुगुणा बताते हैं कि उन्होंने महसूस किया है कि बाहरी कलाकारों से मंचन कराने पंर रामलीला में अपनत्व की भावना नहीं आती है। इसलिए वे अपने यहां के सदस्यों को ही अभिनय के लिए तैयार करते हैं।
इससे एक ओर जहां कलाकारों और समिति के सदस्यों के बीच आपसी तालमेल बना रहता है तो वहीं दूसरी ओर एक-दूसरे के प्रति सम्मान भी बना रहता है। उन्होंने बताया कि वैसे तो सभा की रामलीला वर्ष 1977 से चल रही है, लेकिन वर्ष 1994 में हुए रामपुर कांड में बड़ी संख्या में पहाड़ के लोगों पर अत्याचार हुए थे। इसके विरोध में उन्होंने करीब 20 साल रामलीला का मंचन बंद रखा। इसके बाद वर्ष 2013 में दोबारा मंचन शुरू किया गया। बहुगुणा के मुताबिक, हर साल रामलीला से करीब दो महीने पहले कलाकार रिहर्सल शुरू करते हैं। रामलीला में सदस्यों और कलाकारों सहित करीब 80 लोगों की टीम है, जो पूरे मन और लगन से रामलीला की तैयारी करती है।
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तीन पीढ़ियों से करते आ रहे अभिनय
गढ़वाल सभा में एक परिवार ऐसा भी है, जिसकी तीन पीढ़ियां लगातार रामलीला में अभिनय करती आ रही हैं। स्व. ज्ञान सिंह रावत रावण और मेघनाथ का किरदार निभाते थे। उनके बाद बेटे सुरेंद्र सिंह रावत ने सुग्रीव का अभिनय करना शुरू किया। अब उनके बेटे का रुझान भी रामलीला मंचन की ओर है। बेटे की रामलीला में बढ़ती रुचि को देखते हुए कुछ वर्षों से सुरेंद्र सिंह आरव रावत से भी अभिनय करवा रहे हैं। सुरेंद्र सिंह ने कहा कि वे अपने पिता के आदर्शों को अपनाकर आगे बढ़ रहे हैं। वे चाहते हैं कि पीढ़ी दर पीढ़ी उनके परिवार का कम से कम एक सदस्य रामलीला से जुड़ा रहे।
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अभिनय के लिए छोड़े बेटी की शादी के उत्सव
गढ़वाल सभा की रामलीला में पितांबर बोंडियाल भी अभिनय करते हैं। कुछ दिन बाद ही उनकी बेटी की शादी है। घर में शादी की तैयारियां और हल्दी, मेहंदी, सुंदर कांड जैसे उत्सव चल रहे हैं। सभा ने उन्हें इस बार बेटी की शादी पर ध्यान देने की बात कही तो उन्होंने रामलीला में अभिनय को तव्वजो दी। कहा कि शादी की तैयारियां तो हो जाएंगी, लेकिन अभिनय नहीं छोड़ेंगे। उनकी जिद पर सभा ने उन्हें रामलीला में शामिल किया। दो दिन पहले उनके घर पर सुंदर कांड था, लेकिन वे रामलीला में अभिनय करने पहुंचे।
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बंगलूरू से खींच लाई रामलीला
गढ़वाल सभा के सदस्य सुनील रावत बंगलूरू जॉब करने चले गए थे। कई साल से वे वहीं रह रहे हैं। हालांकि, हर साल रामलीला के दौरान सुनील रावत करीब 15 दिन के लिए रुड़की आते हैं। रामलीला में वे सूर्पनखा और लक्ष्मण का किरदार निभाते हैं।
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उच्च पदों पर कार्यरत हैं रामलीला के कलाकार
गढ़वाल सभा के अधिकतर कलाकार समिति के सदस्य ही हैं। इनमें से बहुत से कलाकार अलग-अलग विभागों में उच्च पदों पर कार्यरत है। नारद का किरदार निभाने वाले विवेक डोभाल डिप्टी डायरेक्टर है। राकेश चौहान आर्मी से सेवानिवृत्त हैं और रामलीला में हनुमान का किरदार निभाते हैं। तेजपाल पटवाल बालि और सुमंत के रूप में दिखाई देते हैं तो भारतेंदु ममगाईं जनक और मारिच का किरदार निभाते हैं।