रुड़की। ईमलीखेड़ा गांव में पिटकुल द्वारा बनाए गए 220 केवी के बिजली घर में समतलीकरण के लिए किए मिट्टी भराव के कार्य में हेराफेरी का मामला संज्ञान में आया है। जिलाधिकारी ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की को जांच के आदेश दे दिए हैं। आरोप है कि समतलीकरण की आड़ में फर्जी एस्टीमेट बनाकर तीन करोड़ से ज्यादा की धनराशि का भुगतान किया गया है।
पिटकुल द्वारा हाल ही में ईमलीखेड़ा गांव में 220 केवी का बिजली घर का निर्माण किया गया है। हरिद्वार निवासी धर्मवीर सैनी और कुछ अन्य लोगों ने जिलाधिकारी दीपक रावत और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर आरोप लगाया है कि इस बिजली घर के निर्माण के लिए किए गए मिट्टी भराव में भारी हेराफेरी की गई है। आरोप है कि एक कंपनी द्वारा भराव का फर्जी एस्टीमेट तैयार कर तीन करोड़ से ज्यादा का भुगतान भी कर लिया। इसमें पिटकुल के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। साथ ही फर्जी मोहर और बिल आदि बनाए जाने का भी आरोप लगाया है। यह मामला संज्ञान में आने पर डीएम दीपक रावत ने जांच के आदेश दे दिए हैं। जिनके अनुपालन में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नितिका खंडेलवाल द्वारा जांच पड़ताल की जा रही है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने बताया कि बताया कि जांच की जा रही है जो भी तथ्य सामने आएंगे। उन पर कार्रवाई की जाएगी। उधर, इस मामले में पुलिस स्तर पर भी जांच की जा रही है। ईमलीखेड़ा चौकी में पहुंचे प्रार्थना पत्र के आधार पर पुलिस जांच में जुट गई है। चौकी प्रभारी धर्मेंद्र राठी ने बताया कि जांच जारी है।