बिजनौर। डीआईओएस दफ्तर तीन महीने तक कन्या विद्या धन की शिकायत को दबाए बैठा रहा। बालिकाएं दफ्तर के चक्कर काटती रहीं। किसी ने उसकी बात नहीं सुनी। डीएम के पोर्टल पर मामला आने पर डीआईओएस दफ्तर के हाथ पांव फूले। आनन फानन में कार्रवाई करते हुए आरोपी संबंधित बाबू को सस्पेंड कर दिया गया है।
डीआईओएस राजेश कुमार के अनुसार दो बालिकाओं ने कन्या विद्या धन का पैसा उनके खातों में नहीं पहुंचने की शिकायत की थी। आरोप है तीन माह बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। दफ्तर शिकायत को दबाए बैठा रहा। बालिकाएं कार्रवाई की जानकारी लेने के लिए डीआईओएस दफ्तर के चक्कर काटती रहीं। डीआईओएस से मिली। बालिकाओं को तरह-तरह के बहाने बनाकर टाल दिया जाता। परेशान होकर शिकायत करने वाली बालिकाओं ने डीएम पोर्टल पर शिकायत डाली। डीआईओएस राजेश कुमार के मुताबिक मामले का संज्ञान 25 जनवरी को सामने आया। उन्होंने 27 जनवरी को बैंक को पत्र लिखकर बालिकाओं का पैसा उनके खातों भेजने को कहा। सात मार्च को बैंक से भेजे गए पत्र से पता चला कि डीआईओएस दफ्तर से भेजे गए बालिकाओं के बैंक खाते गलत थे। बैंक ने डीआईओएस के संयुक्त खाते में पैसा वापिस कर दिया है। उन्होंने नौ मार्च को पैसा शिकायत करने वाली बालिकाओं के खाते में भिजवा दिया है।
लिपिक सस्पेंड
बिजनौर। डीआईओएस राजेश कुमार के अनुसार मामला संज्ञान में आने के कुछ दिन पहले ही उन्होंने कार्यभार ग्रहण किया था। मामला गंभीर है। जांच में प्रथम दृष्टा संबंधित लिपिक की लापरवाही सामने आई है। इस आरोप में बाबू दिनेश कुमार भंडारी को निलंबित कर दिया गया है। निलंबन के दौरान भंडारी अपर निदेशक बेसिक के दफ्तर से संबद्ध रहेंगे।