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ज्वाइंट मजिस्ट्रेट से मिले पार्षद, बोर्ड बैठक बुलाने की मांग

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ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं नगर आयुक्त रुड़की अंशुल सिंह से सोमवार को पार्षदों ने तहसील पहुंचकर मुलाकात की और बोर्ड बैठक कराए जाने की मांग की। पार्षदों ने बताया कि कई महीनों से बोर्ड बैठक का आयोजन नहीं हुआ है जिससे विकास के काम अटके हुए हैं। पार्षदों ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए आचार संहिता से पहले बैठक कराने की मांग की। इसपर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने एडीजीसी की राय लेकर हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने का आश्वासन दिया।
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गौरतलब है कि शासन की ओर से हाल ही में नगर आयुक्त नूपुर वर्मा का तबादला टिहरी कर दिया गया है। इसके साथ ही ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अंशुल सिंह को नगर आयुक्त का प्रभार सौंपा गया है। सोमवार को पार्षद विवेक चौधरी के नेतृत्व में विकास कुमार, धीराज सैनी, आशीष अग्रवाल, प्रमोद पाल, धीरज पाल, संजीव तोमर, कुलदीप तोमर, मांगेराम चौधरी व जेपी शर्मा आदि ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को बताया कि नगर निगम एक्ट के मुताबिक प्रत्येक दो माह में बोर्ड बैठक का आयोजन होना चाहिए। मेयर की ओर से दो वर्ष के कार्यकाल में केवल दो बोर्ड बैठकों का ही आयोजन कराया गया है। अंतिम बैठक भी मार्च माह में हुई थी। इसके बाद से पार्षद लगातार मेयर, नगर आयुक्त और शासन में बोर्ड बैठक कराने को लेकर पत्राचार कर रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इस दौरान पार्षदों ने हाल ही में एक मामले को लेकर हाईकोर्ट की ओर से दो माह में बोर्ड बैठक कराए जाने के नगर निगम को दिए गए आदेश की भी जानकारी दी। इस पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने कहा कि आदेश का अवलोकन किया जा रहा है। उन्होंने बोर्ड बैठक को लेकर हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में एडीजीसी से राय लेकर कार्रवाई किए जाने का भरोसा दिया। इस दौरान पार्षदों ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को ज्ञापन भी सौंपा।
लग न जाए आचार संहिता का अड़गा
वैसे तो हाईकोर्ट ने पिछले दिनों एक आदेश में नगर निगम को दो माह में बोर्ड बैठक का आयोजन कराने के आदेश दिए हैं लेकिन कहीं आचार संहिता का हवाला देकर बोर्ड बैठक को टाल न दिया जाए। इसे लेकर पार्षदों में बेचैनी है। सोमवार को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट पास पहुंचे पार्षदों ने भी उनका ध्यान इस ओर इंगित कराया कि जल्द ही बोर्ड बैठक नहीं होती है तो फिर आचार संहिता का अड़ंगा लग जाएगा। इस पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने कहा कि आचार संहिता में सरकारी कार्य बाधित नहीं होंगे। रही बात चुनाव आयोग से अनुमति लेनी की तो जरूरत पड़ी तो नियमानुसार वह अनुमति भी ली जाएगी।
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निगम एक्ट के साथ खंगाले जाएंगे न्यायालयों के आदेश
नगर निगम के एक्ट में बोर्ड बैठक बुलाने का अधिकार मेयर के पास है लेकिन यदि मेयर बोर्ड बैठक नहीं बुलाते हैं तो इसके लिए क्या प्रावधान है। इसका एक्ट में स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इसके चलते अधिकारी भी पशोपेश में हैं। सोमवार को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने पार्षदों से भी इस बाबत सवाल किए लेकिन कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिल सका। इस पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने कहा कि नगर निगम एक्ट के साथ ही बोर्ड बैठक को लेकर हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अवलोकन कराया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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