सावन के अंतिम सोमवार को नगर के शिवालयों और अन्य मंदिरों में शिव की जय जयकार होती रही। श्रद्धालुओं ने शिवमंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना कर मन्नतें मांगी। इस दौरान शिवालयों को भव्य रूप से सजाया गया था। श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक के साथ ही हवन आदि अनुष्ठान भी संपन्न किए।
रुड़की में रामनगर में राम मंदिर परिसर में सावन माह के आखिरी सोमवार में पूजन एवं दूध अभिषेक किया गया। राममंदिर के पुजारी आचार्य कैलाश चंद शास्त्री ने बताया कि जिस प्रकार भगवान विष्णु को समर्पित दो एकादशी होते हैं, वैसे ही ही माह दो प्रदोष व्रत भी आते हैं। मान्यता है कि सावन के आखिरी सोमवार को रुद्राभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही नहीं, इसदिन भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना करने से बड़े से बड़ा संकट भी टल जाता है। इस दौरान मंदिर परिसर में हवन-यज्ञ का आयोजन ब्राह्मणों द्वारा किया गया। इसमें मंदिर समिति व क्षेत्र के लोगों ने आहुति दी। इस मौके पर पंडित अखिलेश, हेमंत ध्यानी, देवेंद्र सेमवाल, नितिन भट्ट, पवन कुमार, रोशन मैत्री, प्रिया सेमवाल, सरोज ध्यानी, लक्ष्मी, रानी, रावत, रितु गर्ग, राजीव लोचन, प्रियंका मेहंदीरत्ता, संजीव मेहंदीरत्ता, जगदीश लाल, संजय अरोड़ा, दीपक बत्रा, पंकज सतीजा सहित अन्य श्रद्धालु एवं ब्राह्मण लोग उपस्थित रहे। वहीं, लक्सर कस्बे सहित सुल्तानपुर, खानपुर व रायसी के तमाम शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। इसके अलावा सीमली के प्राचीन शिव मंदिर पथलेश्वर महादेव, सुल्तानपुर के पंचेवली मंदिर, खानपुर के जटा शंकर महादेव मंदिर सहित कस्बे व देहात के तमाम मंदिरों में श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। कई मंदिरों में भंडारे का आयोजन भी किया गया।