तीन-तीन विभागों का पर्याप्त बजट और स्टाफ होने के बावजूद अमृत सरोवर योजना अपने लक्ष्य के करीब तक भी नहीं पहुंच पा रही है। योजना के तहत केंद्र सरकार ने 15 अगस्त तक हर हाल में तालाबों के सौंदर्यीकरण का 50 फीसदी काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं जबकि अब तक अधिकतर तालाबों का काम 10 से 20 फीसदी तक ही पहुंच पाया है। ऐसे में अधिकारियों को समीक्षा बैठक के नाम से ही पसीने छूट रहे हैं।
मनरेगा योजना के तहत हरिद्वार के 71 तालाबों को सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार के लिए चयनित किया गया है। योजना के तहत तालाबों के चारों ओर पगडंडी, फूलदार और फलदार पेड़ लगाए जाने हैं। योजना में मनरेगा, जिला पंचायत और ग्राम पंचायत तीन-तीन विभागों का बजट इस्तेमाल हो रहा है। वहीं केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना होने के चलते इस पर सरकार की नजर टिकी हुई है। केंद्र सरकार ने हर जिले को आगामी 15 अगस्त तक हर हाल में तालाबों के सौंदर्यीकरण का काम 50 फीसदी पूरा करने के निर्देश दिए हुए हैं।
अधिकारियों के अनुसार प्रधानमंत्री स्वयं इस योजना की समीक्षा करेंगे जबकि वर्तमान में स्थिति ऐसी है कि जिले में अधिकतर तालाबों पर 10 से 20 फीसदी ही काम पूरा हो पाया है। ये स्थिति तब है जब अधिकारियों के पास तीन-तीन विभागों का बजट होने के साथ ही मनरेगा की पूरी मैन पावर है। वहीं अब बरसात भी शुरू हो चुकी है। ऐसे में तालाबों में पानी एकत्र होना शुरू हो गया है। इस वजह से तालाब खोदाई का काम प्रभावित होगा। इस लिहाज से आगामी 15 अगस्त तक 50 फीसदी काम पूरा करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती है। खंड विकास अधिकारी शिव प्रसाद थपलियाल ने बताया कि फिलहाल तालाबों का 15 से 20 फीसदी काम ही पूरा हुआ है। प्रयास किया जा रहा है कि आगामी 15 तक काम 50 फीसदी पूरा कर लिया जाए।
अनुमति की आड़ में जेसीबी से हो रही खोदाई
दरअसल तालाबों के सौंदर्यीकरण का काम मनरेगा के साथ ही जिला पंचायत और ग्राम पंचायत बजट से भी किया जा रहा है। मनरेगा के काम में मशीनों का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। इसके बावजूद कुछ जगह तालाबों की खोदाई जेसीबी से की जा रही है, पूछने पर अधिकारी अनुमति लेकर खोदाई करने की बात कहते हैं। मनरेगा के नियमों में स्पष्ट है कि तालाबों के किनारे जेसीबी से नहीं खोदे जा सकते हैं। इसके लिए बाकायदा मजदूरों को मजदूरी दी जाती है।